नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज अटल अक्षय ऊर्जा भवन में नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 का अनावरण किया। यह नीति भारत के सहकारी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम है। सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, इस नई नीति से ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका के नए अवसर मिलेंगे।
आज सहकारी क्षेत्र के लिए एक खास दिन
अमित शाह ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि यह नई नीति सहकारिता आंदोलन को नई तकनीक, नवाचार और युवाओं की ऊर्जा से जोड़कर भविष्य के लिए तैयार करेगी। उन्होंने कहा, “आज भारत के सहकारी क्षेत्र के लिए एक खास दिन है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश को नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 मिली है, जो सहकारी क्षेत्र को और मजबूत बनाएगी।”
रोजगार के नए अवसर बनाएगी नीति
सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, इस नई नीति का मकसद सहकारी संस्थाओं को आधुनिक और सक्रिय बनाना है, ताकि वे देश की आर्थिक प्रगति में अधिक योगदान दे सकें। साथ ही, यह नीति ग्रामीण भारत में रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी बनाएगी। भारत ने पहली राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2002 में बनाई थी। तब से बहुत बदलाव आए हैं, जैसे तकनीक और वैश्वीकरण, जिसके कारण अब एक नई नीति की जरूरत थी। नई नीति ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को पाने में सहकारी क्षेत्र की भूमिका को और मजबूत करेगी।
समिति में कौन-कौन शामिल?
नई नीति तैयार करने के लिए 48 सदस्यीय एक समिति बनी थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने की। इस समिति में विभिन्न राज्यों और केंद्रीय सरकार के अधिकारी, सहकारी संघों के सदस्य और विशेषज्ञ शामिल थे। समिति ने अहमदाबाद, बेंगलुरु, गुरुग्राम और पटना में कई बैठकें और क्षेत्रीय कार्यशालाएँ कीं। 648 सुझावों को ध्यान में रखकर नीति बनाई गई है ताकि सभी हितधारकों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
नीति के अनावरण के दौरान, राष्ट्रीय सहकारी संघों के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, मंत्रालय के अधिकारी, और सहकारी विकास से जुड़े संस्थान भी मौजूद थे। इस नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति से देश का सहकारी क्षेत्र और भी ज्यादा समावेशी, आधुनिक और मजबूत बनेगा, जो भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

