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इस्तीफे के बाद जगदीप धनखड़ को मिलेगी कितनी पेंशन? क्या-क्या दी जाएंगी सुविधाएं, जानें हर डिटेल

July 22, 2025

इस्तीफे के बाद जगदीप धनखड़ को मिलेगी कितनी पेंशन? क्या-क्या दी जाएंगी सुविधाएं, जानें हर डिटेल

Jagdeep Dhankhar Pension: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार (21 जुलाई) को अचानक उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। उन्होंने अपने पद से स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा है। धनखड़ ने यह फैसला अपना कार्यकाल पूरा होने से करीब दो साल पहले लिया है। इस तरह वे ऐसे तीसरे उपराष्ट्रपति बन गए हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया। आइये जानते हैं इस खबर को विस्तार से…

धनखड़ का कार्यकाल 2027 तक था

जगदीप धनखड़ का कार्यकाल 11 अगस्त 2027 तक था, यानी अभी भी उनके करीब दो साल बचे हुए थे। लेकिन उन्होंने समय से पहले ही पद छोड़ दिया।

पद छोड़ने के बाद भी मिलती हैं ये सुविधाएं

-अगर कोई उपराष्ट्रपति दो साल से अधिक समय तक अपने पद पर रहा हो और फिर इस्तीफा दे तो उसे रिटायरमेंट जैसी सुविधाएं मिलती हैं।

-हर महीने करीब ₹2 लाख पेंशन (पूर्व वेतन का 50-60%)

-सरकारी टाइप VIII बंगला (बिजली-पानी मुफ्त)

-मुफ्त रेल और हवाई यात्रा

-निःशुल्क इलाज और निजी डॉक्टर की सुविधा

-परिवार को भी सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज

-दो निजी सहायक (PA) और जीवनसाथी के लिए भी एक प्राइवेट सेक्रेटरी

-फर्नीचर, फोन, इंटरनेट और अन्य उपकरण मुफ्त

उपराष्ट्रपति को कितनी सैलरी मिलती है?

-भारत के उपराष्ट्रपति को हर महीने ₹4 लाख रुपये वेतन मिलता है। 2018 में यह वेतन ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹4 लाख किया गया था।

-सरकारी आवास

-चिकित्सा सुविधा

-यात्रा सुविधा

-टेलीफोन, स्टाफ और सुरक्षा
भी मिलती है।

संविधान के तहत दिया इस्तीफा

धनखड़ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंपा। उन्होंने लिखा कि डॉक्टरों की सलाह और स्वास्थ्य कारणों के चलते वे अब पद पर काम नहीं कर सकते, इसलिए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहे हैं।

राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी

संविधान के मुताबिक, उपराष्ट्रपति का इस्तीफा तभी अधिकारिक रूप से स्वीकार किया जाता है, जब राष्ट्रपति उसकी मंजूरी दे दें। धनखड़ ने अपने इस्तीफे में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और कैबिनेट का धन्यवाद भी किया।

धनखड़ ने पहले ही इशारा दिया था

-धनखड़ ने 10 जुलाई को एक कार्यक्रम में कहा था, “अगर भगवान की कृपा रही, तो अगस्त 2027 में मैं रिटायर हो जाऊंगा।” लेकिन उन्होंने इससे पहले ही स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया।

राजनीतिक माहौल गरमाया

धनखड़ के इस्तीफे को लेकर राजनीति में बहस छिड़ गई है। विपक्ष का कहना है कि इसके पीछे बीजेपी की आंतरिक राजनीति हो सकती है। वहीं बीजेपी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और चुप्पी साध रखी है।

 

 

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