नेशनल डेस्क: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। इस दौरान किरेन रिजिजू ने कहा कि अगर हम संशोधन न लाते तो हम जिस जगह पर बैठे हैं, वो भी वफ्क की संपत्ति होती। रिजिजू ने कहा, “मुझे न केवल उम्मीद है, बल्कि मुझे पूरा यकीन है कि इस विधेयक का विरोध करने वालों के दिलों में भी बदलाव आएगा। हर कोई सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ इस विधेयक का समर्थन करेगा।”

कांग्रेस ने बोर्डों को विशिष्ट बनाया
किरेन रिजिजू ने कहा, “2013 में, 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, कुछ ऐसे कदम उठाए गए थे, जो आपके मन में सवाल खड़े करेंगे। 2013 में सिखों, हिंदुओं, पारसियों और अन्य लोगों को वक्फ बनाने की अनुमति देने के लिए अधिनियम में बदलाव किया गया था। हर कोई जानता है कि वक्फ मुसलमानों के लिए अल्लाह के नाम पर वक्फ बनाने के लिए है। यह बदलाव 2013 में कांग्रेस द्वारा किया गया था। कांग्रेस ने बोर्डों को विशिष्ट बनाया, शिया बोर्डों में केवल शिया… एक खंड जोड़ा गया कि वक्फ का हर दूसरे कानून पर प्रभाव होगा। यह खंड कैसे स्वीकार्य हो सकता है?”
#WATCH | After introducing the Waqf Amendment Bill in Lok Sabha, Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju says “A case ongoing since 1970 in Delhi involved several properties, including the CGO Complex and the Parliament building. The Delhi Waqf Board had claimed these as Waqf… pic.twitter.com/qVXtDo2gK7
— ANI (@ANI) April 2, 2025
सत्ता में नहीं आते तो कई संपत्तियां गैर-अधिसूचित हो जातीं
किरेन रिजिजू ने कहा, “दिल्ली में 1970 से चल रहा एक मामला सीजीओ कॉम्प्लेक्स और संसद भवन समेत कई संपत्तियों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इन संपत्तियों को वक्फ संपत्ति होने का दावा किया था। मामला अदालत में था, लेकिन उस समय यूपीए सरकार ने 123 संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करके वक्फ बोर्ड को सौंप दिया था। अगर हमने आज यह संशोधन पेश नहीं किया होता, तो जिस संसद भवन में हम बैठे हैं, उस पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था। अगर पीएम मोदी सरकार सत्ता में नहीं आती, तो कई संपत्तियां गैर-अधिसूचित हो जातीं।”