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‘भारत और रूस ने हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया’, द्विपक्षीय बैठक के दौरान पुतिन से बोले पीएम मोदी

इंटरनेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें भारत और रूस के बीच पुराने और भरोसेमंद रिश्तों पर ज़ोर दिया गया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और रूस ने हमेशा एक-दूसरे का कठिन समय में साथ दिया है।

उन्होंने कहा, “भारत और रूस ने हमेशा सबसे मुश्किल समय में भी कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। हमारा सहयोग न सिर्फ हमारे लोगों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया में शांति, स्थिरता और विकास के लिए भी जरूरी है।” यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ सामानों पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगा दिया है। इसमें रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने पर भी 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है।

यूक्रेन युद्ध पर पीएम मोदी का बयान

पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी बात की और कहा कि भारत हमेशा शांति की कोशिशों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि यह संघर्ष जल्दी खत्म हो और शांति बहाल हो। यह पूरी मानवता की ज़रूरत है।”

 

रूस-भारत संबंधों पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और रूस के बीच लगातार उच्च स्तर की बैठकों और संपर्क बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच विश्वास और समझदारी का रिश्ता है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रही है, जो इस साल दिसंबर में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए आएंगे। उन्होंने कहा, “140 करोड़ भारतीय हमारे 23वें शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन जी का इंतज़ार कर रहे हैं। यह हमारी मजबूत और खास साझेदारी को दर्शाता है।”

पुतिन का जवाब

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत और चीन द्वारा शांति के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया कि उन्होंने यूक्रेन में सत्ता पलट (तख्तापलट) को समर्थन दिया, जिससे ये युद्ध शुरू हुआ। पुतिन ने कहा, “यूक्रेन में जो संकट है, वो किसी हमले से नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों द्वारा किए गए तख्तापलट से शुरू हुआ।”

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बयान

एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) की बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी निष्पक्षता और शांति की बात की। उन्होंने कहा कि हमें द्वितीय विश्व युद्ध से सबक लेकर शीत युद्ध जैसी मानसिकता से बचना चाहिए और किसी भी प्रकार की जबरदस्ती और टकराव की नीति का विरोध करना चाहिए।

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