नई दिल्ली: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्ताकी ने कहा है कि उनका देश किसी भी विदेशी सेना को अपने यहां बेस (सैन्य ठिकाना), खासकर बगराम बेस, इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा। उन्होंने यह बात दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।
मुत्ताकी ने साफ किया, “अफगानिस्तान एक संप्रभु (स्वतंत्र) देश है और रहेगा। हम किसी भी विदेशी सेना को अपनी जमीन पर नहीं आने देंगे। अगर कोई देश संबंध बनाना चाहता है, तो वह राजनयिक तरीके से बात कर सकता है, लेकिन हम अपनी जमीन पर किसी सैन्य वर्दी वाले की मौजूदगी को स्वीकार नहीं करेंगे।”
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भारत के लिए कहा, “करीबी दोस्त है”
अफगान विदेश मंत्री ने भारत को “करीबी दोस्त” बताया और कहा कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कभी भी भारत या किसी भी देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “पिछले चार सालों में हमने यह साबित किया है कि हमारी जमीन का इस्तेमाल किसी और के खिलाफ नहीं हुआ है और आगे भी नहीं होगा।”
‘मिलिट्री बेस बनाना अस्वीकार्य’
मुत्ताकी का यह बयान उस समय आया है जब हाल ही में भारत और कई अन्य देशों ने एक साझा बयान में कहा कि अफगानिस्तान और उसके आस-पास किसी देश का सैन्य ढांचा (मिलिट्री बेस) बनाना “अस्वीकार्य” है। यह बयान मॉस्को में हुई अफगानिस्तान पर बैठक के बाद जारी हुआ था।
भारत दौरे पर जताया आभार
मुत्ताकी ने भारत दौरे को लेकर खुशी जताई और कहा कि उन्हें नई दिल्ली आकर अच्छा लगा। उन्होंने भारत सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के आतिथ्य (मेजबानी) के लिए धन्यवाद दिया। यह तालिबान के 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता में आने के बाद उनका पहला भारत दौरा है।
भारत ने दी 5 एम्बुलेंस
भारत की ओर से अफगानिस्तान को “सद्भावना के प्रतीक” के तौर पर 5 एम्बुलेंस सौंपी गईं। ये 20 एम्बुलेंस के उस बड़े तोहफे का हिस्सा हैं जो भारत ने अफगान लोगों के लिए भेजी हैं। एस. जयशंकर ने कहा कि यह भारत की अफगान लोगों के प्रति “दीर्घकालिक (लंबे समय तक) समर्थन” को दिखाता है।
भारत दोबारा खोलेगा काबुल में दूतावास
जयशंकर और मुत्ताकी की मुलाकात के दौरान भारत ने यह संकेत भी दिया कि वह काबुल में अपना दूतावास दोबारा शुरू कर सकता है, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद बंद कर दिया गया था। अफगान विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश सभी देशों के साथ इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार अच्छे रिश्ते बनाना चाहता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और अन्य देश भी संतुलित नीति अपनाएंगे जिससे आपसी विश्वास बढ़ेगा।