नई दिल्ली: विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर हुई बातचीत में यह साफ किया कि भारत ने कभी भी पाकिस्तान के साथ अपने विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता स्वीकार नहीं की और न ही कभी स्वीकार करेगा। यह बातचीत जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जो कनाडा में आयोजित हुआ था।
प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बारे में पूरी जानकारी दी, जो पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर भारत की सैन्य कार्रवाई का हिस्सा था। पीएम मोदी ने ट्रंप से कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं पड़ी, और यह बातचीत दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधे चैनलों के माध्यम से हुई। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने कभी भी मध्यस्थता स्वीकार नहीं की है, और न ही कभी करेगा। इस पर भारत में पूरी राजनीतिक सहमति है।”
भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से यह भी कहा कि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने ऑपरेशन सिंदूर को बिना किसी उग्रता के और बेहद सटीक तरीके से अंजाम दिया। 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। पीएम मोदी ने कहा कि 6-7 मई की रात को भारत की कार्रवाई बहुत ही रणनीतिक थी और भारत का संदेश यह था कि “गोली का जवाब गोले से” मिलेगा।
इसके बाद 9 मई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने पीएम मोदी से फोन पर बात की और पाकिस्तान द्वारा भारत पर बड़े हमले की संभावना के बारे में चेतावनी दी। पीएम मोदी ने कहा, “अगर पाकिस्तान ने हमला किया तो भारत उसे और भी बड़ी प्रतिक्रिया देगा।” भारत की इस कड़ी प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ट्रंप का दावा और भारत का खंडन
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम को लागू करने में मध्यस्थता की। लेकिन भारत ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से गलत है और भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय रूप से ही किया जाएगा। भारत ने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की मध्यस्थता को भारत ने कभी स्वीकार नहीं किया।
इस बीच, पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में पूरी तरह से समर्थन देने के लिए धन्यवाद भी दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी को अमेरिका आने का निमंत्रण भी दिया, लेकिन पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण पीएम मोदी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। यह बातचीत पीएम मोदी और ट्रंप के बीच 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के बाद पहली बार हुई थी, जिसमें ट्रंप ने पीएम मोदी से संवेदना व्यक्त की थी।

