नेशनल डेस्क: भारतीय वायुसेना इन दिनों मध्य क्षेत्र में एक बड़े क्षेत्र में आक्रमण अभ्यास कर रही है, जिसमें राफेल लड़ाकू विमानों के नेतृत्व में वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों का बेड़ा शामिल है। यह अभ्यास विभिन्न इलाकों, जैसे मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में ज़मीनी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध अभ्यास से जुड़े जटिल मिशनों पर केंद्रित है।
राफेल विमानों के स्क्वाड्रन
भारतीय वायुसेना के पास राफेल विमानों के दो स्क्वाड्रन हैं, जो पश्चिम बंगाल के अंबाला और हाशिमारा में स्थित हैं। ये अत्याधुनिक विमान, जो मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइलों और रैम्पेज जैसे लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हैं, ज़मीनी हमलों और वायु-से-वायु युद्ध के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए हैं।
अभ्यास के उद्देश्य
रक्षा सूत्रों ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न इलाकों में जटिल मिशनों का अभ्यास करना है। इसमें भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान ज़मीनी हमलों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़ी स्थिति में अपने कौशल का परीक्षण कर रहे हैं। इस अभ्यास में वायुसेना के टॉप गन पायलटों द्वारा उच्च मानकों पर प्रशिक्षण लिया जा रहा है, जो इस क्षेत्र में वायु सेना की शक्ति को और मजबूत करेंगे।
तनाव के बीच अभ्यास
यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया है, विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले के बाद। भारतीय वायुसेना इस अभ्यास पर पूरी निगरानी रखे हुए है और यह सुनिश्चित कर रही है कि वायुसेना अपनी बढ़त को बनाए रखे।
नई क्षमताओं के साथ बढ़त
2019 के पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के भीतर सफल हमलों के लिए मिराज 2000 विमान का उपयोग किया था। अब, भारतीय वायुसेना ने राफेल विमानों को भी शामिल किया है और एस-400 वायु रक्षा प्रणाली जैसी नई ताकतवर प्रणालियाँ भी हासिल की हैं। ये नई प्रणालियां भारतीय वायुसेना को दुश्मन के हवाई हमलों के खिलाफ और प्रभावी बनाती हैं।

