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‘सिंधु जल संधि जम्मू-कश्मीर के लिए सबसे गलत समझौता’, निलंबन के फैसले पर बोले सीएम अब्दुल्ला

नेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरा देश एकजुट है और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने की मांग कर रहा है। इस कायराना हमले में 26 लोगों की मौत ने हर किसी झकझोर के रख दिया है। इस आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि समझौते को निलंबित करने का निर्णय लिया है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह संधि जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ सबसे बड़ा अन्याय है।

उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हम कभी भी सिंधु जल संधि के पक्ष में नहीं रहे हैं। यह समझौता जम्मू-कश्मीर के हितों के खिलाफ है। भारत सरकार ने इस पर कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन हमें लगता है कि यह प्रदेश के लिए सबसे अनुचित दस्तावेज है।”

क्या है सिंधु जल संधि?
– 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता हुआ था।
– इसके तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का अधिक पानी देने की बात तय हुई थी।
– जम्मू-कश्मीर के नेता लंबे समय से इसे राज्य के विकास में बाधा मानते आए हैं।

क्या हुआ हाल ही में?
– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 23 अप्रैल को CCS (कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी) की बैठक हुई।
– इसमें सिंधु जल संधि में बदलाव करने का निर्णय लिया गया।
– इसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को आधिकारिक नोटिस भेजकर संधि में बदलाव की सूचना दी।

गृह मंत्री अमित शाह की बड़ी बैठक
अमित शाह शुक्रवार शाम को दिल्ली स्थित अपने आवास पर सिंधु जल संधि को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। बैठक में जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान को पत्र भेजकर संधि में संशोधन की बात बताई। यह पत्र पाकिस्तान के जल मंत्रालय के सचिव सैयद अली मुर्तज़ा को भेजा गया। यह फैसला 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया है, जिसमें 25 भारतीय और 1 नेपाली पर्यटक मारे गए थे।

अन्य राज्यों में कश्मीरी लोगों की सुरक्षा
सीएम उमर ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर भी गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की है। गृह मंत्री ने भरोसा दिया है कि अन्य राज्यों में रह रहे कश्मीरी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। गृह मंत्रालय जल्द ही एक एडवाइजरी जारी करेगा।

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