इंटरनेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में मंगलवार को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। घने जंगलों से निकले भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने पर्यटकों के एक शांतिपूर्ण समूह पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं, जिसमें कम से कम 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। यह हमला न केवल मानवता के खिलाफ एक निंदनीय कृत्य है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है।
घटना के बाद देश भर में शोक की लहर फैल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश यात्रा तत्काल रद्द कर भारत लौटने का फैसला लिया और दिल्ली पहुंचते ही आपातकालीन सुरक्षा बैठक बुलाई। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। बैठक में इस हमले के पीछे की ताकतों, उनकी मंशा और जवाबी रणनीतियों पर चर्चा की गई।
-दुनिया ने की खुलकर निंदा, पाकिस्तान फिर मौन
दुनिया भर के देशों ने इस क्रूर हमले की तीखी निंदा की। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, इटली की प्रधानमंत्री जियोजर्यिया मेलोनी, इजरायल और यूक्रेन सहित कई देशों ने भारत के प्रति एकजुटता दिखाते हुए आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही।
वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान की चुप्पी एक बार फिर आलोचनाओं के केंद्र में आ गई। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक औपचारिक और सीमित बयान जारी किया जिसमें मृतकों के प्रति संवेदना जताई गई, पर हमले को ‘आतंकवादी कृत्य’ कहने या इसकी निंदा करने से साफ परहेज किया गया। यह रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी असहज करने वाला रहा, जो आतंकवाद के खिलाफ एकजुट लड़ाई की अपेक्षा करता है।
-घाटी में सुरक्षा चाक-चौबंद, संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट
हमले के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सभी संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और हालात की समीक्षा की।
-न्याय की मांग और वैश्विक समर्थन
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब भारत वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ एक ठोस नीति और कार्रवाई की मांग कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। इस बर्बर हमले ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। लेकिन पाकिस्तान की ओर से आई शिथिल प्रतिक्रिया ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या वो इस लड़ाई में वास्तव में शामिल होना चाहता है?
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