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अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने बुलाई UNSC की आपात बैठक, बीच मीटिंग में ट्रंप पर भड़के रूस और चीन

इंटरनेशनल डेस्क : ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका द्वारा किए गए हमले के बाद, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से एक आपात बैठक बुलाने की मांग की। परिषद ने इस मांग को स्वीकार करते हुए यह बैठक भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे बुलाई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान को हुए नुकसान और क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा करना था। वहीं इस बैठक दौरान चीन और रूस ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए खरी खोटी सुनाई। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान, IAEA प्रमुख

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने बैठक में बताया कि अमेरिका ने ईरान की कई परमाणु साइट्स पर हमला किया है। फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर बमबारी हुई है, जिससे प्लांट को नुकसान पहुंचा है, हालांकि रेडिएशन लीक नहीं हुआ। इस्फहान प्लांट के प्रवेश मार्गों को निशाना बनाया गया। नतांज साइट पर भी मिसाइल हमले किए गए। ग्रोसी ने कहा कि भले ही रेडिएशन नहीं फैला, लेकिन इन हमलों से संरचनात्मक क्षति हुई है।

अमेरिका ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराया

बैठक में अमेरिका ने कहा कि उसने जो किया वह जरूरी था, क्योंकि वह किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार बनाने नहीं देना चाहता। अमेरिका ने दोहराया कि उसका यह कदम वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी था और उसने जो कुछ किया वह न्यायोचित कार्रवाई थी।

रूस, चीन और PAK ने रखा युद्ध विराम का प्रस्ताव

रूस, चीन और पाकिस्तान ने मिलकर सुरक्षा परिषद में एक युद्ध विराम (सीजफायर) का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव में ईरान में IAEA द्वारा संरक्षित साइट्स पर हुए हमलों की निंदा की गई। इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। इजरायल और ईरान के बीच तत्काल युद्ध विराम की मांग की गई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रस्ताव पर वोटिंग कब होगी, लेकिन संभावना है कि अमेरिका इस पर वीटो कर सकता है।

रूस ने अमेरिका पर लगाया गंभीर आरोप

रूस ने बैठक में अमेरिका की कड़ी निंदा की। रूस के राजदूत वासिली नेबेन्जिया ने कहा कि अमेरिका ने जिस तरह ईरान पर हमला किया, वह ठीक वैसा ही है जैसा उसने 2003 में इराक पर झूठे आरोप लगाकर किया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दुनिया को एक बार फिर “पेंडोरा बॉक्स” यानी समस्याओं का पिटारा खोलकर खतरनाक स्थिति में डाल दिया है।

चीन ने जताई गहरी चिंता

चीन के राजदूत फू कांग ने भी अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि मध्य पूर्व में हालात खराब हो रहे हैं। उन्होंने अमेरिका से संयम बरतने की अपील की और तत्काल युद्धविराम की मांग की। चीन ने स्पष्ट कहा कि वह परमाणु ठिकानों पर किसी भी हमले का विरोध करता है और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के पक्ष में है।

UN महासचिव ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ईरान पहले ही कई समस्याओं से जूझ रहा है और ऐसे में अमेरिका द्वारा की गई बमबारी से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। उन्होंने सभी देशों से कहा कि वे कूटनीति का रास्ता अपनाएं और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। गुटेरेस ने कहा कि रूस-चीन-पाकिस्तान द्वारा पेश किए गए युद्धविराम प्रस्ताव को पहले परिषद के सभी सदस्यों के बीच साझा किया जाएगा और अगले हफ्ते इस पर वोटिंग हो सकती है।

तनावपूर्ण है स्थिति, पर शांति की कोशिशें जारी

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। जहां अमेरिका अपनी सुरक्षा का हवाला देकर हमलों को सही ठहरा रहा है, वहीं रूस, चीन और पाकिस्तान संघर्ष को रोकने और शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। अब यह देखना होगा कि संयुक्त राष्ट्र इस संकट को सुलझाने में कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाता है।

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