इंटरनेशनल डेस्क : ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग और भी गंभीर होती जा रही है। इजरायली सेना ने अब साफ संकेत दिया है कि अगले कुछ दिनों में और भी भीषण हमले हो सकते हैं। इजरायल की ओर से ईरानी नागरिकों को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है कि वे अपने सैन्य हथियार बनाने वाले कारखानों को तुरंत खाली कर दें। ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब इजरायल पहले ही ईरान के कई परमाणु संयंत्र, मिसाइल ठिकाने और सैन्य केंद्रों को निशाना बना चुका है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
फारसी भाषा में ईरान को चेतावनी
आपको बता दें कि इजरायली सेना के प्रवक्ता कर्नल अविचे अद्राई ने फारसी भाषा में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक कड़ी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि ईरान के हथियार उत्पादन केंद्र अब इजरायली हमलों के अगले लक्ष्य होंगे। इससे पहले अद्राई गाजा, लेबनान और यमन के मोर्चों पर भी ऐसे ही इशारे दे चुके हैं, और उसके बाद बड़े हमले हुए थे। इसीलिए अब इस चेतावनी को बेहद गंभीर और संकेतात्मक माना जा रहा है।
ईरान की ओर से बातचीत का प्रस्ताव
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर इजरायल अपने हमले रोक दे तो ईरान भी हमले बंद कर देगा। लेकिन इजरायली नेतृत्व इस बात पर सहमत नहीं दिख रहा है। उनके अनुसार, ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी दुनिया के लिए खतरा है और इसे रोकना जरूरी है।
अभी और आएंगे हमले, ये तो सिर्फ शुरुआत…
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक सख्त बयान देते हुए कहा है कि, “अब तक के हमले उस बड़े ऑपरेशन की सिर्फ शुरुआत थे। जो आगे आने वाला है, वह अब तक से कहीं अधिक बड़ा और निर्णायक होगा।” उन्होंने इस पूरे अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।
ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना
इजरायल ने अपने सैन्य अभियान को नाम दिया है “ऑपरेशन राइजिंग लॉयन”। इस ऑपरेशन के तहत इजरायली सेना ने अब तक ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया है। मिसाइल फैक्ट्रियों और सैन्य हेडक्वार्टर पर हमले किए। इसके साथ ही ऑयल डिपो और गैस रिफाइनरी को भी क्षतिग्रस्त किया इन हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं। इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म करना बताया गया है।
मध्य पूर्व में तनाव चरम पर
ईरान और इजरायल के बीच यह संघर्ष अब सीमित नहीं रहा। यह पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है। जहां एक तरफ संघर्ष को रोकने के प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन पर हालात और गंभीर हो रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या कोई अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता संभव हो पाएगी, या यह टकराव और भयानक रूप लेगा।

