नेशनल डेस्क : 21 जून 2025 को अमेरिका ने अचानक ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों पर हवाई हमला कर दिया। ये ठिकाने थे फोर्डो, नतांज और इस्फहान, जो ईरान के सबसे संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले परमाणु प्रतिष्ठान हैं। अमेरिका ने इस हमले में B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया जो दुश्मन के रडार से बचकर उड़ान भर सकते हैं। इसके अलावा नतांज और इस्फहान पर अमेरिका ने 30 टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें भी दागीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस हमले से फोर्डो पूरी तरह नष्ट हो गया है और यह अमेरिका की एक बड़ी सैन्य कामयाबी है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
हमारे न्यूक्लियर प्लांट्स सुरक्षित हैं…
दरअसल, इस बड़े हमले के बाद ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था (AEOI) ने 22 जून को पहला आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका के हमलों के बावजूद उनके सभी परमाणु ठिकाने पूरी तरह सुरक्षित हैं। संस्था ने यह भी कहा कि अब तक की सुरक्षा जांच में कहीं से भी किसी तरह के रेडिएशन लीक का संकेत नहीं मिला है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम किसी भी हालात में बंद नहीं होगा और इसे राष्ट्रीय औद्योगिक योजना के तहत हर हाल में आगे बढ़ाया जाएगा।
रेडिएशन लीक की आशंकाओं पर लगाई गई रोक
हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही थी कि कहीं इन हमलों के कारण रेडिएशन रिसाव न हो गया हो। सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगी थीं। लेकिन ईरान की परमाणु संस्था ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि सुरक्षा जांच पूरी हो चुकी है और सभी न्यूक्लियर साइट्स रेडिएशन से मुक्त पाई गई हैं। इस बयान से यह संकेत भी दिया गया कि ईरान अपनी सुरक्षा प्रक्रिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के प्रति पारदर्शिता बरतने को तैयार है।
अमेरिका और ईरान के बीच विरोधाभासी दावे
जहां एक ओर अमेरिका इस हमले को अपनी जीत बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने इसे महज राजनीतिक प्रचार करार दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के B-2 बमवर्षकों ने फोर्डो जैसे किलेबंद न्यूक्लियर प्लांट को बर्बाद कर दिया है, जबकि ईरान की तरफ से दावा किया गया कि उनके सभी ठिकाने पूरी तरह सही-सलामत हैं और परमाणु गतिविधियां पहले की तरह जारी रहेंगी। इन विरोधाभासी बयानों से यह स्पष्ट है कि दोनों देश इस घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप
ईरान ने अमेरिका के इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है। ईरान की परमाणु संस्था ने कहा कि यह हमला न केवल उनकी संप्रभुता पर चोट है बल्कि वैश्विक शांति की दिशा में एक गंभीर खतरा भी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस हमले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कानूनी कार्यवाही शुरू करेंगे और अमेरिका की निंदा करने की मांग भी उठाएंगे। ईरान ने दुनिया के अन्य देशों से अपील की है कि वे एक शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार की रक्षा में उनका समर्थन करें।
क्या इस हमले से बढ़ेगा तनाव?
इस घटना के बाद मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों में यह हमला और भी गंभीरता लेकर आया है। ईरान की तरफ से यह संकेत दिया गया है कि उनका जवाब कूटनीतिक होगा, लेकिन भविष्य में सैन्य प्रतिक्रिया से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका अहम हो जाती है, ताकि इस टकराव को युद्ध में बदलने से रोका जा सके।
21 जून 2025 को अमेरिका द्वारा किए गए हमले और 22 जून को ईरान की प्रतिक्रिया ने दुनिया को यह दिखा दिया कि परमाणु कार्यक्रमों को लेकर वैश्विक राजनीति किस हद तक संवेदनशील है। जहां अमेरिका इसे सुरक्षा के नाम पर कार्रवाई बता रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला कूटनीतिक हल की ओर बढ़ता है या हालात और बिगड़ते हैं।

