नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस साल कनाडा में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल न होने की खबरों को लेकर सरकार पर हमला किया। उन्होंने इसे एक और “बड़ी कूटनीतिक चूक” करार दिया और कहा कि छह साल में पहली बार भारत इस सम्मेलन में शामिल नहीं होगा।
यह कूटनीतिक चूक है: जयराम रमेश
जयराम रमेश ने कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति और अंतरराष्ट्रीय नीतियों को आकार देने की जरूरत के बीच जी7 जैसे प्रमुख मंचों में भारत की उपस्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से पोस्ट में लिखा, “भारतीय प्रधानमंत्रियों को जी7 शिखर सम्मेलनों में आमंत्रित करने की परंपरा 2014 से चली आ रही थी, लेकिन अब पहली बार भारत इस सम्मेलन में भाग नहीं लेगा। यह कूटनीतिक चूक है।”
पूर्व प्रधानमंत्री का दिया उदाहरण
रमेश ने इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का उदाहरण दिया, जो 2007 में जी8 शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे और इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर बातचीत के लिए प्रसिद्ध ‘सिंह-मर्केल सूत्र’ का अनावरण किया था। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी के प्रमुख देशों के साथ-साथ ब्राजील, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, यूक्रेन और ऑस्ट्रेलिया के नेता भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। जयराम रमेश ने विशेष रूप से 2014 से पहले जी7 में रूस के भी शामिल होने की बात की, जब इसे जी8 के नाम से जाना जाता था।
उन्होंने कहा कि जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की अनुपस्थिति ने भारत की वैश्विक भूमिका को कमजोर किया है। इसके अलावा, जयराम रमेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के दावे पर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की अनुमति देना भारतीय विदेश नीति की बड़ी गलती है। यह दशकों पुरानी नीति को पलटने जैसा है।” भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर जयराम रमेश ने कहा कि ट्रंप का बयान भारत की विदेश नीति के खिलाफ है और यह देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है।

