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सबरीमाला मंदिर में गायब हुए सोने को लेकर केरल की सियासत गरमाई, विपक्ष ने मंत्री का मांगा इस्तीफा

नई दिल्ली। केरल के मशहूर सबरीमाला मंदिर से जुड़ी सोने की चोरी के आरोपों ने पूरे राज्य की सियासत को गर्म कर दिया है। अब यह मामला विधानसभा तक पहुंच गया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन यूडीएफ (UDF) ने इस मुद्दे को लगातार दूसरे दिन विधानसभा में जोर-शोर से उठाया। विपक्षी नेताओं ने देवसोम बोर्ड मंत्री वी.एन. वासवन के इस्तीफे की मांग की। जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्ष ने नारेबाजी और तख्तियां लहराना शुरू कर दिया। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन ने कहा कि मंत्री को इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए।

हाईकोर्ट ने जांच के दिये आदेश
केरल हाईकोर्ट ने इस विवाद को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को पूरी जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने इस जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है, जिसकी अगुवाई एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) एच. वेंकटेश करेंगे। इस जांच की जिम्मेदारी आईपीएस अधिकारी एस. शशिधरन को सौंपी गई है, जो त्रिशूर स्थित केईपीए के सहायक निदेशक (प्रशासन) हैं। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि यह जांच 6 हफ्तों के अंदर पूरी की जानी चाहिए।

विवाद की जड़ क्या है?
मंदिर के गर्भगृह (मुख्य स्थान) के बाहर द्वारपालक (दरवाजे के रक्षक) की पत्थर की मूर्तियां हैं। इन मूर्तियों पर तांबे की शीट चढ़ाई गई है, जिसके ऊपर सोने की परत (गोल्ड प्लेटिंग) की गई थी। अब आरोप है कि इस सोने की परत से छेड़छाड़ की गई है और कुछ सोना गायब है।

कैसे शुरू हुआ मामला
साल 2019 में मंदिर के पैनलों (सोने से मढ़े तांबे के हिस्सों) की मरम्मत की गई थी। ये पैनल त्रावणकोर देवसोम बोर्ड ने एक स्पॉन्सर उन्नीकृष्णन पोट्टी को सौंपे थे।मरम्मत के बाद जब ये पैनल लौटाए गए, तो वजन में 4.541 किलोग्राम की कमी पाई गई। यानी जितना वजन गया था, उतना वापस नहीं आया। सितंबर 2025 में एक बार फिर इन पैनलों को हटाया गया, कहा गया कि “उन्हें नुकसान हो रहा था।” लेकिन इस बार हाईकोर्ट की पूर्व अनुमति नहीं ली गई, जिससे मामला और बढ़ गया।

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पुलिस को क्या मिला?
जांच के दौरान 28 सितंबर को उन्नीकृष्णन पोट्टी की बहन के घर (तिरुवनंतपुरम) से दो पेडस्टल (आधार) बरामद किए गए। इसके बाद चोरी के शक और बढ़ गया।

बोर्ड ने दी सफाई
त्रावणकोर देवसोम बोर्ड ने सभी आरोपों को झूठा और भ्रामक बताया है। बोर्ड ने कहा कि “द्वारपालक मूर्तियों के 14 गोल्ड-प्लेटेड पैनलों का कुल वजन लगभग 38 किलो था, जिनमें 397 ग्राम सोना शामिल था। बोर्ड के अनुसार, 2 पैनल सबरीमाला में ही रखे गए थे। बाकी 12 पैनलों को चेन्नई की “स्मार्ट क्रिएशन्स” नाम की कंपनी को मरम्मत के लिए भेजा गया था। मरम्मत के दौरान केवल 10 ग्राम नया सोना इस्तेमाल किया गया। काम पूरा होने के बाद, कुल सोना बढ़कर 407 ग्राम हो गया, यानी सोने की कोई चोरी नहीं हुई।

उन्नीकृष्णन का नाम क्यों जुड़ा?
बोर्ड ने कहा कि 2019 में जब पहली बार मरम्मत हुई थी, तब स्पॉन्सर उन्नीकृष्णन पोट्टी ने 40 साल की वारंटी (गारंटी) दी थी। इसलिए जब 2025 में दोबारा मरम्मत की जरूरत पड़ी, तो उसी स्पॉन्सर से संपर्क किया गया। बोर्ड का दावा है कि सोने की चोरी का कोई सबूत नहीं है और यह सिर्फ राजनीतिक विवाद बना दिया गया है।

 

 

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