नेशनल डेस्क: लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में बड़ा हादसा हो गया। दुनिया के सबसे ऊंचे और कठिन युद्धक्षेत्र में एक आधार शिविर पर हिमस्खलन आ गया। इस हादसे में तीन सैनिक शहीद हो गए, जिनमें दो अग्निवीर भी शामिल हैं। तीनों जवान तीनों गुजरात, उत्तर प्रदेश और झारखंड के रहने वाले थे।
राहत और बचाव अभियान जारी
हिमस्खलन 12,000 फीट की ऊंचाई पर हुआ। जैसे ही घटना की सूचना मिली, सेना ने तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया। बचाव दल ने तीनों शहीद सैनिकों के शव निकाल लिए हैं। पांच जवान हिमस्खलन में फंसे हुए हैं, एक कैप्टन को बचा लिया गया है।
वर्तमान में सेना ने राहत कार्य और तेज़ कर दिया है। ग्लेशियर जैसी कठिन जगह पर काम करने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। सेना लगातार सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा कर रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से सैनिकों को ज्यादा सुरक्षा मिल सके।
सियाचिन में पहले भी हुए हैं हादसे
साल 2021 में सब-सेक्टर हनीफ इलाके में हिमस्खलन से दो सैनिकों की मौत हुई थी। हालांकि, घंटों की कोशिश के बाद कई सैनिक और पोर्टर बचा लिए गए थे। 2019 में 18,000 फीट ऊंचाई पर गश्त के दौरान चार सैनिक और दो पोर्टर हिमस्खलन की चपेट में आकर शहीद हो गए थे।
2016 में 10 सैनिकों की गई थी जान
2016 में 19,600 फीट ऊंचाई पर हिमस्खलन ने दस सैनिकों की जान ले ली थी। इन्हीं में लांस नायक हनमनथप्पा कोप्पड़ भी थे, जो बर्फ से जिंदा निकाले गए थे, लेकिन बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने से उनका निधन हो गया। राष्ट्र अपने इन वीर सपूतों के बलिदान को नमन कर रहा है, जो देश की सुरक्षा के लिए कठिन से कठिन हालात में तैनात रहते हैं।

