नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कुछ मस्जिदों पर लाउडस्पीकर से अज़ान देने पर पाबंदी लगाई गई है। इसके बाद अब मस्जिदों ने एक मोबाइल ऐप “ऑनलाइन अज़ान” के जरिए अज़ान देने की नई शुरुआत की है। इस ऐप की मदद से नमाजी अपने मोबाइल पर ही अज़ान सुन सकेंगे। मस्जिदों में लाउडस्पीकर को लेकर महीनों से चल रहा विवाद अब तकनीक के ज़रिए शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया है। मुस्लिम समुदाय ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर एक नया तरीका अपनाया है, जिससे अजान अब मोबाइल ऐप के माध्यम से लोगों तक पहुंच रही है।
कैसा है यह ऑनलाइन अज़ान ऐप?
मस्जिदों ने क्यों उठाया ये कदम?
मुंबई की माहिम जुमा मस्जिद के ट्रस्टी फहद खलील पठान ने बताया कि पुलिस की तरफ से लाउडस्पीकर के उपयोग पर चेतावनी दी गई थी। इसके चलते मस्जिद ने माइक बंद कर दिया। लेकिन अज़ान का समय बताने के लिए उन्होंने तकनीक का सहारा लिया। इस ऐप के जरिए नमाजी घर बैठे अज़ान का वक्त जान सकते हैं और अज़ान सुन भी सकते हैं।
इन तकनीकी सुविधाओं से लैस है ऐप
किसने बनाया ऐप?
नमाज़ियों की प्रतिक्रिया क्या रही?
बहुत से नमाजियों ने इस पहल की सराहना की है। लोगों का कहना है कि अब वे मस्जिद की अज़ान से जुड़े रह सकते हैं, भले ही लाउडस्पीकर बंद हो। सिर्फ तीन दिनों में 500 से ज्यादा लोग ऐप पर रजिस्टर हो चुके हैं। अभी तक मुंबई की 6 मस्जिदें इस ऐप से जुड़ चुकी हैं।
संघर्ष नहीं, तकनीक से समाधान
फहद पठान का कहना है –”हमने टकराव का रास्ता नहीं चुना, बल्कि नवाचार (innovation) को अपनाया है। अब लाउडस्पीकर न होने पर भी नमाजियों को अज़ान का समय मालूम होता है और वे जुड़ाव महसूस करते हैं।”
पारंपरिक लाउडस्पीकर की जगह टेक्नोलॉजी
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