नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई शनिवार को नागपुर पहुंचे, जहां नागपुर जिला वकील संघ ने उनके सम्मान में एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए भावुक हो गए।
पिता का याद कर भावुक हुए CJI गवई
CJI गवई ने कहा, “मेरे पिता हमेशा कहते थे कि मैं एक दिन सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस बनूंगा। आज वो सपना सच हुआ है, लेकिन यह देखने के लिए वो इस दुनिया में नहीं हैं। 2015 में उनका निधन हो गया था। उनकी कमी आज बहुत महसूस हो रही है। हालांकि मुझे खुशी है कि मेरी मां आज इस खास पल में मेरे साथ हैं।”
मराठी में भाषण दिया
मुख्य न्यायाधीश गवई ने इस कार्यक्रम में मराठी में भाषण दिया। उन्होंने अपने ऑक्सफोर्ड में दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) हमेशा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संविधान की रक्षा और आम लोगों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए जरूरी है।

संविधान के अनुसार काम करे सरकार
उन्होंने यह भी साफ किया कि भारतीय संविधान ने तीनों संस्थाओं, विधायिका (लॉ बनाने वाली संस्था), कार्यपालिका (सरकार चलाने वाली संस्था) और न्यायपालिका (न्याय देने वाली संस्था) की सीमाएं तय की हैं। गवई ने कहा, “कानून बनाना संसद और विधानसभाओं का काम है। सरकार को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए। लेकिन अगर कोई कानून संविधान के खिलाफ है, तो न्यायपालिका को उसमें दखल देने का हक है।”
हर विषय में हस्तक्षेप न करे न्यायपालिका
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका को हर विषय में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने समझाया, “न्यायिक सक्रियता जरूरी है, लेकिन यह कभी भी न्यायिक दुस्साहस (Judicial Adventurism) या न्यायिक आतंक (Judicial Terrorism) में नहीं बदलना चाहिए।” CJI गवई के इस भावुक और संतुलित भाषण ने वहां मौजूद लोगों को काफी प्रभावित किया।