
नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र के नागपुर शहर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक होटल की आड़ में देह व्यापार चलाया जा रहा था। इस गोरखधंधे का संचालन कोई और नहीं, बल्कि पिता और उसका जवान बेटा मिलकर कर रहे थे। पुलिस की क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि नागपुर के बेसा रोड पर स्थित एक होटल में देह व्यापार का अवैध कारोबार चल रहा है। इसी सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की सामाजिक सुरक्षा शाखा ने कार्रवाई की और होटल में छापा मार दिया। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
छापेमारी कर दो महिलाओं को छुड़ाया
आपको बता दें कि छापेमारी के दौरान होटल में दो महिलाओं को रेस्क्यू किया गया। इनमें से एक महिला अविवाहित थी, जबकि दूसरी तलाकशुदा और लगभग 50 साल की थी। पुलिस ने बताया कि होटल में काम करने वाली महिलाएं बेहद गरीब और ज़रूरतमंद थीं, जिन्हें आरोपी अपनी लालच भरी बातों से फंसा लेते थे और फिर उन्हें देह व्यापार में धकेल देते थे। होटल में ग्राहकों को बुलाया जाता और उनसे 5,000 रुपये लिए जाते, जिनमें से केवल 1,500 रुपये महिलाओं को दिए जाते थे।
कोडवर्ड से होती थी बुकिंग…
पूरे रैकेट का तरीका बहुत सुनियोजित था। ग्राहक जब होटल में आता था तो उसे पहले रूम बुकिंग के बहाने रोका जाता और फिर एक कोडवर्ड दिया जाता। इस कोडवर्ड के ज़रिए ग्राहक को महिला और कमरा सौंपा जाता था। यह पूरा नेटवर्क पिता और पुत्र मिलकर चला रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान सचिन गंगाधर टुले (47 वर्ष) और उसके बेटे प्रज्वल सचिन टुले (22 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों नागपुर के दत्तधामनगर, बेसा इलाके के निवासी हैं और पिछले तीन साल से यह होटल चला रहे थे।
पुलिस ने मोबाइल सहित जब्त किए सबूत
दरअसल, क्राइम ब्रांच की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान होटल से कुल 42,610 रुपये की नकदी, मोबाइल फोन और अन्य सबूत जब्त किए हैं। साथ ही दोनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके खिलाफ देह व्यापार से संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस रैकेट से और कौन-कौन जुड़े हैं और क्या यह नेटवर्क किसी अन्य शहर या राज्य में भी फैला हुआ है।
गंभीर अपराध पर सख्त रुख, आगे की जांच जारी
पुलिस इस मामले को गंभीर अपराध मानकर जांच कर रही है, क्योंकि इसमें न सिर्फ महिलाओं का शोषण हो रहा था, बल्कि समाज में अपराध फैलाने की एक सुनियोजित कोशिश भी की जा रही थी। ऐसे मामलों में यह जरूरी है कि न केवल आरोपी सज़ा पाएं, बल्कि पीड़ित महिलाओं को भी पुनर्वास और सुरक्षा मिले। पुलिस आगे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुट गई है, ताकि पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचा जा सके।