नेशनल डेस्क : भारत के लिए एक गर्व का क्षण आने वाला है। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अब 25 जून (बुधवार) को अंतरिक्ष के लिए रवाना होंगे। यह मिशन अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA और स्पेसएक्स के सहयोग से चलाए जा रहे Axiom-4 मिशन का हिस्सा है। भारतीय समय अनुसार दोपहर 12:01 बजे यह मिशन फॉल्कन-9 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
अंतरिक्ष जाने वाले दूसरे भारतीय
आपको बता दें कि शुभांशु शुक्ला भारत के दूसरे ऐसे व्यक्ति होंगे जो अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे। उनसे पहले राकेश शर्मा ने वर्ष 1984 में सोवियत मिशन के साथ अंतरिक्ष की यात्रा की थी। शुभांशु इस मिशन में पायलट की भूमिका निभा रहे हैं। उनके साथ मिशन की कमांडर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन हैं। साथ ही, हंगरी के टिबोर कापू और पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की इस मिशन के अन्य एक्सपर्ट एस्ट्रोनॉट हैं।
लॉन्चिंग 6 बार टल चुकी है
Axiom-4 मिशन की लॉन्चिंग अब तक 6 बार टल चुकी है। मूल रूप से इसे 29 मई को लॉन्च किया जाना था, लेकिन खराब मौसम, ऑक्सीजन और केमिकल लीकेज, तथा तकनीकी समस्याओं के कारण इसे लगातार टाला गया। अब उम्मीद है कि मौसम अनुकूल रहेगा और मिशन 25 जून को सफलतापूर्वक लॉन्च होगा।
मिशन का उद्देश्य और रिसर्च
बता दें कि Axiom-4 मिशन में अंतरिक्ष यात्री 14 दिन तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर रहकर लगभग 60 वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। इनमें कई रिसर्च भारतीय वैज्ञानिकों के साथ मिलकर की जाएंगी।
कुछ प्रमुख रिसर्च इस प्रकार हैं…
स्प्राउट्स और बीजों पर माइक्रोग्रैविटी का असर
माइक्रोग्रैविटी यानी गुरुत्वहीनता की स्थिति में पौधों के बीज कैसे अंकुरित होते हैं, यह देखा जाएगा। एल्गी और अन्य जैविक तत्वों पर रेडिएशन और माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव भी समझा जाएगा।
इंसुलिन और ब्लड शुगर पर रिसर्च
अंतरिक्ष में ब्लड शुगर लेवल में आने वाले उतार-चढ़ाव को समझने के लिए एस्ट्रोनॉट ग्लूकोज मॉनिटर पहनेंगे। उनके पास इंसुलिन पेन भी रहेगा, जिसे अलग-अलग तापमान में स्टोर करके यह देखा जाएगा कि गुरुत्वहीनता में इंसुलिन के अणुओं पर क्या असर होता है। यह रिसर्च खासकर डायबिटीज़ के मरीज़ों और लकवाग्रस्त मरीजों के लिए नई वियरेबल टेक्नोलॉजी विकसित करने में मदद कर सकती है।
बुर्जील होल्डिंग्स की अहम भूमिका
इस मिशन में UAE की हेल्थ सर्विस कंपनी ‘बुर्जील होल्डिंग्स’ भी एक अहम भागीदार है। कंपनी के CMO डॉ. मोहम्मद फितयान ने बताया कि इस प्रयोग से अंतरिक्ष में इंसानी शरीर पर ब्लड शुगर के असर को समझा जाएगा। इससे भविष्य में ऐसे उपकरण बनाए जा सकते हैं जो बिस्तर पर पड़े मरीजों की ब्लड शुगर और इंसुलिन कंट्रोल में मदद करें। Axiom-4 मिशन सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अवसर है। शुभांशु शुक्ला की यह उड़ान भारत को फिर से अंतरिक्ष में पहुंचाने वाली है। अगर मिशन सफल होता है, तो यह भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए भी नई राहें खोलेगा।

