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National Doctor’s Day 2025 : जानें क्यों मनाते हैं डॉक्टर्स डे… क्या है सफेद कोट पहनने की वजह

नई दिल्ली। National Doctor’s Day भारत में 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस मनाया जाता है, जो हमें डॉक्टरों के प्रति अपना सम्मान और आभार व्यक्त करने का मौका देता है। यह दिन डॉक्टर्स के अथक समर्पण और सेवा को सम्मानित करने का अवसर है। नेशनल डॉक्टर्स डे प्रसिद्ध चिकित्सक और भारत के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है।

वहीं, जब भी हम बीमार होते हैं या किसी गंभीर समस्या का सामना करते हैं, तो सबसे पहले हमें डॉक्टर की जरूरत होती है। वो न सिर्फ हमें दवाइयां देते हैं बल्कि हमें एक स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाते हैं। महामारी, दुर्घटना या किसी आपदा में भी डॉक्टर अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात काम करते हैं।

डॉक्टर बनना आसान नहीं…

एक अच्छा डॉक्टर बनने के लिए कई सालों की पढ़ाई और मेहनत करनी पड़ती है। चाहे सामान्य डॉक्टर हों, सर्जन हों या किसी अंग के स्पेशलिस्ट-सभी को चिकित्सा की लंबी ट्रेनिंग से गुजरना होता है। इसके बाद भी डॉक्टर लगातार खुद को बेहतर बनाने के लिए नई-नई चीजें सीखते रहते हैं।

डॉक्टर्स डे क्यों मनाते हैं?

हर साल 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। इस दिन हम उन सभी डॉक्टरों को धन्यवाद कहते हैं जो हमारे जीवन को बचाते हैं और समाज की सेवा करते हैं।

क्यों पहनते हैं डॉक्टर सफेद कोट?

जब कोई छात्र मेडिकल की पढ़ाई पूरी करता है, तो एक खास कार्यक्रम में उसे सफेद कोट पहनाया जाता है। इसे “वाइट कोट सेरेमनी” कहा जाता है। यह कोट इस बात का संकेत होता है कि अब छात्र एक जिम्मेदार डॉक्टर बन गया है। इस परंपरा की शुरुआत डॉ. अर्नोल्ड पी. गोल्ड ने की थी।

पहले डॉक्टर काले कपड़े पहनते थे

बहुत पहले डॉक्टर सफेद नहीं, बल्कि काले कपड़े पहनते थे। इसका कारण यह था कि उस समय डॉक्टर के पास जाना एक गंभीर बात मानी जाती थी और काला रंग गंभीरता का प्रतीक होता है। उस समय मेडिकल विज्ञान भी उतना विकसित नहीं था, और लोग डॉक्टर को अंतिम विकल्प समझते थे।

सफेद कोट का प्रचलन कब शुरू हुआ?

19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में डॉक्टरों ने सफेद कोट पहनना शुरू किया। सफेदी को स्वच्छता और शुद्धता का प्रतीक माना गया। जैसे-जैसे मेडिकल साइंस ने तरक्की की, डॉक्टरों और मरीजों के बीच भरोसा बढ़ा और सफेद कोट सम्मान और चिकित्सा की पहचान बन गया।

सफेद कोट पहनने से क्या फर्क पड़ता है?

जब मरीज किसी अस्पताल या क्लिनिक में आते हैं और डॉक्टर को सफेद कोट में देखते हैं, तो उन्हें भरोसा होता है कि यह व्यक्ति उनकी मदद करेगा। यह कोट डॉक्टर की पहचान और उसकी जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है।

सभी डॉक्टर सफेद कोट नहीं पहनते

हालांकि, कुछ डॉक्टर सफेद कोट नहीं पहनते। जैसे कि बच्चों के डॉक्टर (बाल रोग विशेषज्ञ) या मनोचिकित्सक (साइकोलॉजिस्ट)। इसकी वजह यह है कि कुछ मरीज सफेद कोट से डर महसूस करते हैं, खासकर बच्चे। इसके अलावा, कुछ देशों जैसे डेनमार्क और इंग्लैंड में डॉक्टरों के लिए सफेद कोट पहनना जरूरी नहीं होता।

 

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