Last Updated: September 20, 2026

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‘नेहरू ने दो बार देश का विभाजन किया, सिंधु जल संधि को… ‘, NDA बैठक में कांग्रेस पर बरसे पीएम मोदी

August 19, 2025

‘नेहरू ने दो बार देश का विभाजन किया, सिंधु जल संधि को… ‘, NDA बैठक में कांग्रेस पर बरसे पीएम मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को एनडीए संसदीय बैठक में जवाहरलाल नेहरू पर हमला करते हुए कहा कि नेहरू ने खुद स्वीकार किया था कि पाकिस्तान के साथ 1960 में हुई सिंधु जल संधि से भारत को कोई फायदा नहीं हुआ। मोदी ने कहा कि यह संधि किसानों के लिए नुकसानदेह थी, क्योंकि इस समझौते के तहत 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को दे दिया गया था।

नेहरू ने दो बार देश का विभाजन किया: मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेहरू ने देश को दो बार विभाजित किया था, पहला विभाजन 1947 में हुआ और दूसरा सिंधु जल संधि के दौरान हुआ, जब भारत ने 80 प्रतिशत जल पाकिस्तान को दे दिया। सूत्रों के अनुसार, मोदी ने कहा कि नेहरू ने बाद में अपने सचिव के माध्यम से अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा था कि इस संधि से भारत को कोई फायदा नहीं हुआ।

सिंधु जल संधि को विश्वासघात बताया

बैठक में मौजूद भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने सिंधु जल संधि को विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कहा कि नेहरू को इस समझौते के लिए संसद की मंजूरी लेनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। पाल ने कहा, “नेहरू पाकिस्तान गए, समझौते पर हस्ताक्षर किए और अकेले ही वापस आ गए। यह हमारे किसानों के साथ विश्वासघात था।”

नेहरू की आलोचना करते हुए भाजपा ने किया हमला

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने भी नेहरू की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेहरू जी ने कैबिनेट की मंजूरी के बिना पाकिस्तान को 80 करोड़ रुपये दिए। प्रसाद ने कहा कि संधि पर हस्ताक्षर से पहले संसद में चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

भारत ने न्यायालय का फैसला खारिज किया

भारत ने हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय के हालिया फैसले को भी खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि न्यायालय का फैसला भारत के जल उपयोग अधिकारों पर कोई असर नहीं डालता और इस फैसले को कानूनी तौर पर अमान्य बताया।

सिंधु जल संधि पर भारत का रुख

भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) को तब तक स्थगित कर दिया था जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करना बंद नहीं करता। अप्रैल में पहल्गाम आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे, इसके बाद भारत ने यह कदम उठाया।

 

सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में पेश किया

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का भी परिचय कराया। उन्हें ओबीसी समुदाय का ज़मीनी नेता बताया और कहा कि वह स्वभाव से सरल हैं और राजनीति में “खेल” नहीं करते।

सिंधु जल संधि का इतिहास

सिंधु जल संधि पर 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि में, पाकिस्तान को पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) और भारत को पूर्वी नदियां (रावी, व्यास, सतलुज) दी गईं थीं। विश्व बैंक भी इस संधि का एक हस्ताक्षरकर्ता है।

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