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Mahakumbh Stampede : 37 नहीं 82 लोगों की हुई थी मौत! 26 के नाम लिस्ट में नहीं… नई रिपोर्ट में बड़ा दावा

नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश में महाकुंभ 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चला था। इसमें शामिल होने के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए थे। लेकिन मौनी अमावस्या की रात मची भगदड़ और उसमें हुई मौतों को लेकर उत्तर प्रदेश में विवाद बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों और मीडिया रिपोर्टों में अंतर ने राजनीतिक दलों को सरकार पर सवाल उठाने का मौका दिया है। आइए जानते हैं इस घटना के बारे में विस्तार से।

क्या हुआ था मौनी अमावस्या की रात ?

आपको बता दें कि 29 जनवरी 2025 को मौनी अमावस्या थी, जो महाकुंभ का प्रमुख स्नान दिवस माना जाता है। इस दिन संगम में लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने पीपा पुल को शाही स्नान के लिए बंद कर दिया था, जिससे भीड़ का दबाव बढ़ गया। करीब 1:10 बजे रात को पोल नंबर 12 के पास बैरियर टूटने से भगदड़ मच गई। इसमें 200 से अधिक लोग कुचले गए थे।

50 जिलों में जाकर जानकारी जुटाई गई…

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस घटना में 37 लोगों की मौत की पुष्टि की थी। लेकिन बीबीसी की रिपोर्ट में दावा किया गया कि कम से कम 82 लोग इस भगदड़ में मारे गए थे। इनमें से 26 परिवार ऐसे मिले परिवार मिले जिन्होंने भगदड़ में अपनों को खोया लेकिन उनके नाम मृतकों की सूची में शामिल नहीं किए गए थे। रिपोर्ट में 11 राज्यों के 50 जिलों में जाकर जानकारी जुटाई गई थी। इस अंतर ने राजनीतिक दलों को सरकार पर सवाल उठाने का मौका दिया है। वहीं इस घटना के बाद कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें एक महिला कांस्टेबल अधिकारियों को फोन पर स्थिति की गंभीरता बता रही थी। एक अन्य वीडियो में भीड़ भागती हुई नजर आ रही थी। इन वीडियो ने घटना की भयावहता को उजागर किया।

राजनीतिक दलों ने उठाई आवाज 

वहीं इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर “तथ्य बनाम सत्य: 37 बनाम 82” लिखते हुए कहा कि सत्य को कब तक छिपाया जाएगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि महाकुंभ मृत्यु-मुआवजे में जो राशि नकद दी गई, वह कहां गई। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बीबीसी की रिपोर्ट इस मामले की शुरुआत है, न कि अंत।

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