नेशनल डेस्क: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 14 जुलाई 2025 को दावा किया कि उन्हें सिगंदूर पुल के उद्घाटन कार्यक्रम और शिवमोगा जिले में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के शिलान्यास समारोह के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। इस कारण, विरोध स्वरूप उन्होंने और उनके मंत्रियों ने कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। वहीं, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि सिद्धारमैया को 11 जुलाई को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था और 12 जुलाई को उन्हें डिजिटल माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का अनुरोध किया गया था।
सिद्धारमैया का आरोप
सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम के लिए न तो औपचारिक निमंत्रण मिला और न ही राज्य के किसी अन्य मंत्री को बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि वह गडकरी से फोन पर बात कर चुके हैं और इस बारे में उन्हें सूचित किया था।
गडकरी का बचाव
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर बताया कि मुख्यमंत्री को कार्यक्रम के लिए 11 जुलाई को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, और 12 जुलाई को पत्र भेजकर डिजिटल रूप से कार्यक्रम में उपस्थिति का अनुरोध किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार हमेशा प्रोटोकॉल का पालन करती है और कर्नाटक सरकार के सहयोग की सराहना करती है।
कार्यक्रम का महत्व
गडकरी ने शिवमोगा में सिगंदूर पुल का उद्घाटन किया, जो भारत का दूसरा सबसे लंबा केबल पुल है। इस पुल का निर्माण 472 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है, और यह क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सिद्धारमैया की आपत्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को इस तरह के कार्यक्रमों के बारे में पहले से सूचित किया जाना चाहिए था। उन्होंने गडकरी से अनुरोध किया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों की योजना बनाने से पहले राज्य सरकार से परामर्श करना अधिक उपयुक्त होगा।
राजनीतिक टकराव का सवाल
जब सिद्धारमैया से पूछा गया कि क्या इस विवाद से केंद्र और राज्य के बीच टकराव होगा, तो उन्होंने कहा कि टकराव की शुरुआत केंद्र ने की है। उनका मानना है कि प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें और उनके मंत्रियों को आमंत्रित किया जाना चाहिए था।
केंद्र-राज्य संबंध
सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि राज्य सरकार भी केंद्रीय परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए केंद्रीय मंत्रियों को आमंत्रित करती है और प्रोटोकॉल का पालन करती है। उन्होंने कहा कि केंद्र को भी इसी तरह का आदान-प्रदान करना चाहिए था।

