नेशनल डेस्क: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में नए आपराधिक कानूनों पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ये कानून भारत की न्यायिक व्यवस्था को बदलने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब न्याय देर से नहीं, बल्कि समय पर, सुलभ और सरल तरीके से मिलेगा।
न्याय में देरी अब इतिहास बनने जा रही है
अमित शाह ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की न्याय प्रणाली को लेकर यह धारणा बन गई है कि यहाँ न्याय मिलने में बहुत देर होती है। लेकिन अब नए आपराधिक कानून इस धारणा को बदल देंगे। उन्होंने कहा कि इन नए कानूनों के ज़रिए न्यायिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। शाह ने कहा, “अब हमारी न्यायिक व्यवस्था सिर्फ सज़ा देने पर नहीं, बल्कि न्याय देने पर आधारित होगी।”
#WATCH | Jaipur, Rajasthan: Union Home Minister Amit Shah says, “… I read a comment by Gehlot ji that we only signed MoUs worth Rs 35 lakh crore, how much will we put on the ground? At that time, no one responded. But today I want to tell Ashok Gehlot that this is the… pic.twitter.com/S1OStwOOH5
— ANI (@ANI) October 13, 2025
कौन-कौन से हैं ये नए कानून?
भारत सरकार ने तीन नए कानून लागू किए हैं, जो पुराने ब्रिटिश काल के कानूनों की जगह ले रहे हैं। ये कानून हैं, भारतीय न्याय संहिता अधिनियम (BNS), 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSS), 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSSS), 2023। इन कानूनों को लागू करने के लिए गृह मंत्रालय राज्यों को पूरी मदद और मार्गदर्शन दे रहा है।
2027 के बाद कोई भी मामला 3 साल में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचेगा
अमित शाह ने बताया कि नए सिस्टम के तहत 2027 के बाद अगर कोई FIR दर्ज होती है, तो तीन साल के भीतर वह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच जाएगा। यानी अब सालों-साल केस लटकने की संभावना कम होगी।
राजस्थान में दोषसिद्धि दर में भारी इजाफा
अमित शाह ने कहा कि इन कानूनों के लागू होने के एक साल के अंदर ही राजस्थान में दोषसिद्धि दर 42% से बढ़कर 60% हो गई है। उन्होंने भरोसा जताया कि जब ये कानून पूरी तरह लागू हो जाएंगे, तब यह दर 90% तक पहुँच सकती है। उन्होंने कहा, “इन कानूनों में वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे सबूत जुटाना और फैसले देना आसान होगा।”
वैज्ञानिक जांच के लिए नया ढांचा
शाह ने बताया कि राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) की स्थापना 2020 में की गई थी ताकि वैज्ञानिक पद्धतियों से अपराध की जांच हो सके। अब देशभर में इसके संबद्ध कॉलेज खोले जा रहे हैं और एक नई पीढ़ी तैयार की जा रही है जो अपराध जांच में आधुनिक तरीकों का उपयोग करेगी।
#WATCH | Jaipur, Rajasthan: Union Home Minister Amit Shah says, “… In Rajasthan, the conviction rate was previously only 42%. Three new laws have been implemented, and it has been just one year, yet this rate has already risen to 60%. When these are fully implemented, the… pic.twitter.com/1HRAXgZtNY
— ANI (@ANI) October 13, 2025
पीड़ितों के अधिकार और समयबद्ध प्रक्रिया
नए कानूनों में पीड़ितों को समय पर जानकारी देना अनिवार्य किया गया है। FIR के बाद 90 दिनों के अंदर पीड़ित को केस की जानकारी देनी होगी। 14 दिनों के भीतर पुलिस रिपोर्ट की कॉपी पीड़ित को दी जानी चाहिए। 60 या 90 दिनों में आरोप पत्र दाखिल करना अनिवार्य होगा। साथ ही, गैरमौजूद अभियुक्तों पर मुकदमा चलाने का प्रावधान भी किया गया है।
आतंकवाद और डिजिटल अपराध की पहली बार परिभाषा
शाह ने कहा कि नए कानूनों में आतंकवाद, मॉब लिंचिंग, संगठित अपराध और डिजिटल अपराध को पहली बार कानूनी रूप से परिभाषित किया गया है। इससे इन अपराधों से निपटना ज्यादा प्रभावी होगा। अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने 9,315 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।

