
नई दिल्ली: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा राष्ट्रीय गहरे जल अन्वेषण मिशन की शुरुआत के मौके पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दिया। यह मिशन समुद्र के नीचे तेल और गैस भंडारों की खोज के लिए शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य 2032 तक राष्ट्रीय भंडार को दोगुना और 2047 तक वर्तमान उत्पादन को तिगुना करना है।
हरदीप सिंह पुरी ने एक पोस्ट में कहा, “गहरे जल अन्वेषण से प्राप्त होने वाले तेल और गैस के भंडार से देश की तस्वीर बदल जाएगी।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कई सुधार किए गए हैं। इसमें हाइड्रोकार्बन के घरेलू अन्वेषण और उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयास शामिल हैं।
नए भारत के समुद्र मंथन से जो अमृतरूपी तेल/गैस का भंडार मिलेगा वह देश की तस्वीर बदल देगा।
India’s quest for energy security resonates from the ramparts of the Red Fort.
PM Sh @narendramodi Ji lays emphasis on the importance of National Deep Water Mission in India’s efforts to… pic.twitter.com/mNnj4vHD0C— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) August 15, 2025
पुरी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में 52 खोजें की गई हैं, और 2014 से अब तक 172 खोजें की गईं, जिनमें 66 अपतटीय (समुद्र के नीचे) खोजें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 2009 से 2014 के बीच जहां केवल 82,327 वर्ग किमी क्षेत्र आवंटित किया गया था, वहीं अब 0.38 मिलियन वर्ग किमी क्षेत्र को आवंटित किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय गहरे जल मिशन का उद्देश्य समुद्र के नीचे तेल और गैस के भंडार की खोज करना है। उन्होंने कहा, “यह मिशन ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत स्वदेशीकरण को बढ़ावा देगा।” इस मिशन के तहत 2032 तक राष्ट्रीय भंडार को दोगुना करने और 2047 तक वर्तमान उत्पादन को तिगुना करने का लक्ष्य है। इस पहल से भारत को ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाने का उद्देश्य रखा गया है।
ऊर्जा के लिए भारत कई देशों पर निर्भर है। पेट्रोल, डीजल व गैस के लिए भारत लाखों करोड़ रूपए खर्च करता है।
इस संकट से देश को आत्मनिर्भर बनाना नए भारत का लक्ष्य भी है और देश की जरूरत भी।
PM @narendramodi जी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बीते 11 वर्षों… pic.twitter.com/Z9doTslGeC
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) August 15, 2025
इस मिशन को प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘समुद्र मंथन’ के रूप में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा, “हम अब समुद्र मंथन की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह मिशन मोड में लागू किया जाएगा और ऊर्जा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को दिखाएगा।” इससे पहले, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भी इस साल फरवरी में गहरे समुद्र अन्वेषण के लाभों की बात की थी, जिसमें जैव विविधता, खनिज संसाधन, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी सशक्तिकरण के फायदे शामिल हैं।
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