Last Updated: October 11, 2026

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One Nation One Election : कांग्रेस ने विधेयक पेश करने का किया विरोध, Lok Sabha में दिया नोटिस

December 17, 2024

One Nation One Election : कांग्रेस ने विधेयक पेश करने का किया विरोध, Lok Sabha में दिया नोटिस

One Nation One Election : कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में वन नेशन वन इलेक्शन विधेयक पेश किए जाने का विरोध करने के लिए एक नोटिस दिया है। उन्होंने सोमवार को नोटिस में लिखा, कि ‘मैं संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक, 2024 को प्रक्रिया नियम के नियम 72 के तहत पेश किए जाने का विरोध करने के अपने इरादे का नोटिस देता हूं।‘ उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक पर उनकी आपत्तियां संवैधानिकता और संवैधानिकता के बारे में गंभीर चिंताओं पर आधारित हैं।

अपनी आपत्तियों को सूचीबद्ध करते हुए उन्होंने नोटिस में लिखा कि विधेयक ‘संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। संविधान का अनुच्छेद 1 स्थापित करता है कि इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ होगा, जो इसके संघीय चरित्र की पुष्टि करता है। संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक 2024, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने का प्रस्ताव करता है, राज्यों में एकरूपता लागू करके इस संघीय ढांचे को सीधे चुनौती देता है।‘

उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम से राज्य की स्वायत्तता खत्म होने, स्थानीय लोकतांत्रिक भागीदारी कम होने और सत्ता के केंद्रीकरण का जोखिम है, जिससे बहुलवाद और विविधता को नुकसान पहुंचेगा, जो भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार की आधारशिला है। अलग-अलग राज्यों के अनूठे राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों की अनदेखी न केवल उनकी विशिष्टता की उपेक्षा करती है बल्कि संविधान में निहित संघवाद और लोकतंत्र के सिद्धांतों को भी बुनियादी तौर पर कमजोर करती है।‘

कांग्रेस नेता ने कहा कि विधेयक संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित करेगा। एक साथ चुनाव कराने के लिए संविधान में अनुच्छेद 82ए को शामिल करने का प्रस्ताव राज्य विधानसभाओं को समय से पहले भंग करने की आवश्यकता पैदा करता है, जिससे संविधान के अनुच्छेद 83 और 172 के तहत गारंटीकृत विधायी निकायों के निश्चित कार्यकाल में प्रभावी रूप से बदलाव होता है, जिसे प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से और संशोधित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कदम केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित मूल ढांचे के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो संसद को संविधान में इस तरह से संशोधन करने से रोकता है जिससे इसके मूल सिद्धांतों को नुकसान पहुंचे।

कांग्रेस सांसद के नोटिस में कहा गया है, ‘विधेयक शासन के संघीय चरित्र को कमजोर करके और एकरूपता लागू करने और शक्तियों के पृथक्करण और गणतंत्रत्मक और लोकतांत्रिक ढांचे सहित बुनियादी ढांचे के मुख्य तत्वों का उल्लंघन करता है। जैसा कि माननीय मुख्य न्यायाधीश सीकरी ने फैसले में जोर दिया है कि संविधान की सर्वोच्चता, इसके संघीय और धर्मनिरपेक्ष चरित्र और शक्तियों के पृथक्करण जैसे मूलभूत सिद्धांत संसद के संशोधन प्राधिकरण पर अंतर्नहित सीमाएं लगाते हैं। यह प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण अतिक्रमण का प्रतिनिधित्व करता है, जो संविधान के मूलभूत चरित्र को खतरे में डालता है।‘

तिवारी ने यह भी कहा कि यह विधेयक राज्य सरकारों को कमजोर करता है। यह विधेयक राज्य विधानसभा चुनावों को आम चुनावों के साथ कराने का प्रयास करता है, जो संविधान में निहित संघीय ढांचे के लिए एक सीधी चुनौती है। चुनाव प्रक्रियाओं को केंद्रीकृत करके, विधेयक निर्वाचित राज्य सरकारों के अधिकार को कमजोर करता है, वहीं जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को कमजोर करता है और स्थानीय शासन की स्वायत्तता का अतिक्रमण करता है। इसके अलावा, ऐसे मामलों में जहां राज्य सरकारें भंग होती हैं, अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की विस्तारित अवधि की संभावना केंद्रीय नियंत्रण को मजबूत करने का जोखिम उठाती है, जिससे संघवाद के मूलभूत सिद्धांत नष्ट हो जाते हैं।

तिवारी के नोटिस में लिखा, कि ‘संवैधानिक और प्रक्रियात्मक चिंताओं के मद्देनजर मैं संविधान (एक सौ उनतीसवां संशोधन) विधेयक 2024 को इसके वर्तमान स्वरूप में पेश करने का कड़ा विरोध करता हूं। मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि जब तक इन मुद्दों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया जाता है, तब तक इसे पेश करने पर पुनर्विचार करें।‘ सरकार ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया है।

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