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‘आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार नहीं, ऑपरेशन सिंदूर से दिया कड़ा संदेश’, लोकसभा में बोले जयशंकर

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की कार्रवाई और विदेश नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि भारत किसी भी तरह के आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और पाकिस्तान को इसका मुंहतोड़ जवाब दिया गया है।

पहलगाम हमले के बाद कड़े कदम

जयशंकर ने बताया कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने कई सख्त कदम उठाए जैसे, 23 अप्रैल को सिंधु जल समझौता रोका गया। अटारी बॉर्डर चेक पोस्ट बंद किया गया। पाकिस्तानी नागरिकों को भारत से वापस भेजा गया। पाकिस्तानी रक्षा प्रतिनिधि को दूतावास से निकाल दिया गया।

 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीति

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने भी हमले की निंदा की और हमलावरों को सज़ा देने की बात कही। 25 अप्रैल को जब UNSC में चर्चा हो रही थी, तभी आतंकी संगठन टीआरएफ (TRF) ने हमले की जिम्मेदारी ली। इसके बाद भारत ने टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित कर दिया।

ऑपरेशन सिंदूर की योजना और संदेश

जयशंकर ने बताया कि 25 अप्रैल के बाद प्रधानमंत्री मोदी से उनकी 27 बार बात हुई, और “ऑपरेशन सिंदूर” की रणनीति बनाई गई। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में नौ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया। खासकर बहावलपुर और मुरिदके जैसे आतंकी अड्डों पर सटीक हमले किए गए। दुनिया के 193 देशों में से सिर्फ 3 ने ही इस ऑपरेशन का विरोध किया। बाकी ने भारत के रुख को समझा और समर्थन दिया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

जयशंकर ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के समय कई देशों के विदेश मंत्रियों ने भारत से संपर्क किया, जानना चाहा कि भारत क्या कर रहा है। भारत ने उन्हें साफ कहा कि वह मध्यस्थता नहीं चाहता, सिर्फ आतंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है।

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई 

जयशकंर ने कहा कि 10 मई को हमे पता लगा कि पाकिस्तान सीजफायर के लिए तैयार है, हमने कहा कि ये निवेदन पाकिस्तान की ओर से किया जाएगा। इसे लेकर अमेरिका से कोई कॉल नहीं आई। 22 अप्रैल से 17 जून के बीच पीएम मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कोई बात नहीं हुई।

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