इंटरनेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 जून 2025 को पहली बार साइप्रस की आधिकारिक यात्रा पर पहुँचे थे। यहाँ उन्हें साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडोलाइड्स ने गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी को साइप्रस सरकार ने देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस तृतीय’ दिया। यह सम्मान भारत और साइप्रस के बीच गहरे और ऐतिहासिक रिश्तों की प्रतीक है। साइप्रस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कनानैस्किस शहर के लिए रवाना हो चुके हैं, जहाँ वे 16-17 जून को G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
क्या है G7 शिखर सम्मेलन ?
साइप्रस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कनानैस्किस शहर पहुंचे हैं, जहाँ वे 16-17 जून को G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। G7 (Group of Seven) दुनिया के 7 सबसे विकसित और ताक़तवर देशों का समूह है – अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान। हर बार की तरह इस बार भारत को भी विशेष आमंत्रण पर बुलाया गया है।
#WATCH | Cyprus: Prime Minister Narendra Modi emplanes for Canada, where he will attend the 51st G7 Summit in Kananaskis, Alberta.
(Video Source: DD) pic.twitter.com/I6sVZrOsZg
— ANI (@ANI) June 16, 2025
वैश्विक संकट और एजेंडा
इस बार के सम्मेलन पर कई बड़े मुद्दों की छाया है…
-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किया गया व्यापार युद्ध
-वैश्विक आर्थिक मंदी, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी सुरक्षा
-“इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकनॉमिक कॉरिडोर” (IMEC) को बढ़ावा देना
प्रधानमंत्री मोदी का मकसद वैश्विक नेताओं के सामने भारत की भूमिका को मजबूत करना और नए व्यापारिक अवसरों को तलाशना है। प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन देशों की यात्रा (साइप्रस, कनाडा और आगे क्रोएशिया संभावित) भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करने और राजनयिक, आर्थिक तथा सामरिक स्तर पर नए रिश्तों की नींव रखने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

