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PM मोदी ने ‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ लॉन्च किया, पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और संरक्षण होगा आसान

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘ज्ञान भारतम् पोर्टल’ का शुभारंभ किया। यह पोर्टल भारत की प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने और आम जनता तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

क्या है ‘ज्ञान भारतम्’?
‘ज्ञान भारतम्’ भारत की हजारों साल पुरानी पांडुलिपि विरासत को सुरक्षित रखने, उन्हें डिजिटाइज़ करने और उनके ज्ञान को लोगों तक पहुँचाने का एक राष्ट्रीय अभियान है। यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक ज्ञान को सहेजकर आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत की सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल 2047 तक एक विकसित भारत बनाने के संकल्प का हिस्सा है, जहाँ हम अपने प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक को जोड़कर विश्वगुरु बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

आयोजन और भागीदारी
इस मौके पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनका विषय था, “पांडुलिपि विरासत के माध्यम से भारत की ज्ञान परंपरा को पुनः प्राप्त करना”। यह सम्मेलन 11 से 13 सितंबर तक चला और इसमें 1,100 से अधिक विद्वानों, विशेषज्ञों, संस्थानों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

पोर्टल के उद्देश्य क्या हैं?
‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल को एक व्यापक रणनीति के साथ डिज़ाइन किया गया है, जिसके प्रमुख उद्देश्य हैं, देशभर की पांडुलिपियों की पहचान और दस्तावेज़ीकरण, नाजुक और दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण और पुनर्स्थापन, AI तकनीक की मदद से बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण, एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार (National Digital Repository) का निर्माण पांडुलिपियों का अनुसंधान, अनुवाद और प्रकाशन, विद्वानों और संरक्षणकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण, वैश्विक सहयोग और भागीदारी को बढ़ावा देना और शिक्षा में प्राचीन भारतीय ज्ञान को शामिल करना।

इसका महत्व क्या है?
यह पहल भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को न सिर्फ सुरक्षित रखेगी, बल्कि उसे दुनिया के साथ साझा भी करेगी। इससे देश के छोटे गाँवों और दूरदराज़ इलाकों में छिपी ज्ञान की संपत्ति को सामने लाने में मदद मिलेगी। यह पोर्टल जन सहभागिता, तकनीकी सहयोग और वैश्विक नेटवर्किंग के माध्यम से भारत को एक ज्ञान महासत्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम करेगा।

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