नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नवकार महामंत्र दिवस’ पर एक सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने जैन धर्म की भारत की पहचान को आकार देने में भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और इस समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए देश की दृढ़ प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
जैन धर्म का योगदान अमूल्य
प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत की पहचान को मजबूत करने में जैन धर्म का योगदान अमूल्य है। इस महत्वपूर्ण धरोहर को संरक्षित करने की हमारी प्रतिबद्धता हर जगह दिखती है, चाहे वह हमारे लोकतंत्र का मंदिर नई संसद भवन हो।” उन्होंने नई संसद भवन का उल्लेख करते हुए बताया कि “शार्दुल द्वार” से संसद भवन में प्रवेश करते ही ‘स्थापत्य’ गैलरी में ‘सम्मेद शिखर’ की छवि दिखाई देती है। इसके अलावा लोकसभा में एक तीर्थंकर की मूर्ति और भगवान महावीर की अद्भुत पेंटिंग भी है। दक्षिण भवन की दीवार पर सभी 24 तीर्थंकरों की मूर्तियां भी दर्शाई गई हैं।
#WATCH | Delhi: At the ‘Navkar Mahamantra Divas’ program, Prime Minister Narendra Modi says, “…The influence of Jainism is clearly visible in the new Parliament building, too. As soon as you enter the new Parliament building through the Shardula Dwar, you can see the ‘Sammed… pic.twitter.com/IpGtkDs8IS
— ANI (@ANI) April 9, 2025
प्रधानमंत्री ने जैन साहित्य के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे “भारत की बौद्धिक भव्यता की रीढ़” बताया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म का साहित्य भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर का अहम हिस्सा है, और इसे संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है। प्रधानमंत्री ने प्राकृत और पाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के सरकार के निर्णय को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि ये दोनों भाषाएं जैन और बौद्ध परंपराओं से गहरे रूप से जुड़ी हुई हैं और इनका सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है।
अपने बचपन के दिनों को याद किया
प्रधानमंत्री मोदी ने जैन धर्म से अपने व्यक्तिगत संबंधों को भी साझा किया और बताया कि उनका जन्म गुजरात में हुआ, जहां जैन धर्म का प्रभाव हर गली में दिखाई देता है। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद किया जब वे जैन आचार्यों के संपर्क में रहते थे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने जैन धर्म के पवित्र मंत्र ‘नवकार महामंत्र’ का सामूहिक जाप किया। यह मंत्र जैन धर्म में आंतरिक शांति, आत्म-उन्नति और अहिंसा के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए उच्चारित किया जाता है। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर सामूहिक मंत्र जाप को एक आध्यात्मिक और एकीकृत अनुभव बताया।
कौन-कौन हुए कार्यक्रम में शामिल
नवकार महामंत्र दिवस का आयोजन जैन धर्म के शाश्वत शिक्षाओं का सम्मान करने और अहिंसा, सत्य, आत्म-अनुशासन, और आंतरिक शांति के मूल्यों को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया था। इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी शामिल हुए। इसके अलावा जैन भिक्षु, धार्मिक विद्वान, और अनुयायी भी उपस्थित थे और उन्होंने मंत्र का जाप किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम के माध्यम से समुदायों के बीच भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा देने का महत्व भी बताया और जैन धर्म के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

