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Iran–Israel War का 10वां दिन, PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात, इन मुद्दों पर हुई चर्चा

नेशनल डेस्क : 13 जून से ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध रुकने का नाम नहीं ले रही है। वहीं अब इस युद्ध में अमेरिका की एंट्री भी हो चुकी है। इस बीच भारत ने  भी तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बातचीत की और शांति का संदेश दिया। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

PM मोदी की शांति की अपील

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने लिखा कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति के साथ मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा की और हाल की घटनाओं में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है कि दोनों देश संयम दिखाएं, संवाद बढ़ाएं और कूटनीति के ज़रिए समाधान तलाशें।

अमेरिका के आने से युद्ध में नया मोड़

रविवार की रात को इस युद्ध में अचानक बड़ा मोड़ तब आया, जब अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हवाई हमला किया। अमेरिकी वायुसेना ने फोर्डो, नतांज और इस्फहान में बम गिराए। ये सभी स्थान ईरान के प्रमुख न्यूक्लियर फैसिलिटी माने जाते हैं। हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि, “हमने ईरान के परमाणु ठिकानों को निष्क्रिय कर दिया है। अब ईरान को शांति के रास्ते पर लौटना चाहिए।” ट्रंप ने पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए भी हमले की जानकारी दी थी।

अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना 

ईरान पर अमेरिकी हमले के तुरंत बाद कई देशों ने नाराजगी जताई और हमले की निंदा की।

-चीन

-पाकिस्तान

-संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
जैसे देशों ने अमेरिका से संयम बरतने की अपील की और कहा कि यह हमला मध्य पूर्व की शांति को और अस्थिर कर सकता है।

कूटनीति के जरिए संकट सुलझाने की कोशिश

भारत, जो पारंपरिक रूप से दोनों देशों (ईरान और इजरायल) के साथ मजबूत संबंध रखता है, इस टकराव को कूटनीति के ज़रिए सुलझाने की कोशिश में लगा है। पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और संतुलित पहल मानी जा रही है। भारत ने युद्ध की शुरुआत से ही शांति और स्थिरता की वकालत की है, और लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।

क्या कूटनीति से रुक सकेगा यह युद्ध ?

अब जब अमेरिका खुलकर युद्ध में कूद चुका है और ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला कर चुका है, तो तनाव और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में भारत जैसे देशों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। पीएम मोदी की पहल से उम्मीद की जा रही है कि बातचीत और कूटनीति के रास्ते कुछ राहत जरूर मिलेगी।

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