
भुवनेश्वर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विपक्षी दलों पर सत्ता हासिल करने के लिए देश को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि ‘सत्ता के भूखे’ ये लोग जनता से सिर्फ झूठ बोलते आए हैं। उन्होंने इस क्रम में साल 2019 के लोकसभा चुनाव में राफेल विमान सौदे में कथित भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस की ओर से चलाए गए ‘चौकीदार चोर है’ अभियान का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो ‘चौकीदार’ 2019 में उनके लिए ‘चोर’ था, वह साल 2024 आते-आते ‘ईमानदार’ हो गया और अब वे एक बार भी चौकीदार को चोर नहीं बोल पाते।
उन्होंने कहा, ‘इनका (विपक्ष का) मकसद सिर्फ यही है कि किसी तरह देश की जनता को गुमराह करने के लिए सत्ता पर कब्जा किया जाए, ताकि देश को लूटा जा सके।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि लगातार हो रही चुनावी हार ने विपक्षी दलों के भीतर इतना गुस्सा भर दिया है कि वे अब देश के खिलाफ ‘साजिश’ करने में जुट गए हैं और अपना गुस्सा जनता पर ही निकालने लगे हैं।
भाजपा की ओडिशा इकाई की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘उनकी झूठ और अफवाह की दुकान 50-60 साल से चल रही है। अब उन्होंने इस अभियान को और तेज कर दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘इनका मकसद सिर्फ यही है कि किसी तरह देश की जनता को गुमराह करने के लिए सत्ता पर कब्जा किया जाए, ताकि देश को लूटा जा सके।’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘सत्ता के भूखे ये लोग जनता से सिर्फ झूठ बोलते आए हैं। जब इनका एक झूठ लोगों पर काम नहीं करता, तो उससे बड़ा दूसरा झूठ ये गढ़ते हैं। ये अपने कार्यकत्र्ताओं को भी झूठा दिलासा देने के लिए यही करते हैं।’ उन्होंने विपक्ष के कारनामों को बहुत बड़ी चुनौती करार दिया और देशवासियों से हर पल सतर्क और जागरूक रहने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पार्टी कार्यकत्र्ताओं में विश्वास भर दिया है और यही भाजपा की विशेषता और उसके कार्यकत्र्ताओं का सामथ्र्य है। उन्होंने कहा, ‘विपक्षी दल भाजपा सरकार के खिलाफ सुबह शाम दुष्प्रचार करते रहते हैं। लेकिन जनता भाजपा सरकार के कामों को देखकर उन्हें आशीर्वाद देने खुद मैदान में दौड़ पड़ती है।’
मोदी ने कहा कि दुनिया में भारत का प्रभाव 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कई गुना अधिक हो गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति में नीतिगत विरोध बहुत स्वाभाविक है, लेकिन पिछले कुछ समय से एक बहुत बड़ा बदलाव यह हुआ है कि भारत के संविधान की भावनाओं को कुचल दिया जाता है और लोकतंत्र की सारी मान-मर्यादाओं को अस्वीकार किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ता को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं, उनके पास केंद्र की सत्ता पिछले एक दशक से नहीं है।
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