इंटरनेशनल डेस्क : गाजा पट्टी में इजरायल द्वारा चलाए जा रहे सैन्य अभियानों को लेकर यूनाइटेड किंगडम (UK), फ्रांस और कनाडा जैसे कई पश्चिमी देशों ने चिंता और विरोध जताया है। इन देशों का कहना है कि इजरायल ने गाजा में सैन्य कार्रवाई की रफ्तार बढ़ा दी है, जिससे मानवीय संकट और बढ़ रहा है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
PM बेंजामिन नेतन्याहू ने दिया कड़ा जवाब
इन देशों की आलोचना पर इजरायल के PM बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि जो देश इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, वे दरअसल 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमास के आतंकी हमले को नजरअंदाज कर रहे हैं। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि इन देशों की आलोचना से ऐसा लगता है जैसे वे इस आतंकी हमले को “इनाम” दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब हमारे नागरिकों को बेरहमी से मारा गया था, तब हम पर हमला हुआ था। अब जब हम आतंक के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं, तो हमें नैतिकता का पाठ पढ़ाया जा रहा है?”
By asking Israel to end a defensive war for our survival before Hamas terrorists on our border are destroyed and by demanding a Palestinian state, the leaders in London, Ottowa and Paris are offering a huge prize for the genocidal attack on Israel on October 7 while inviting more…
— Benjamin Netanyahu – בנימין נתניהו (@netanyahu) May 19, 2025
आत्मरक्षा पर सवाल उठाना, आतंक को समर्थन देना
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि जो देश इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार पर सवाल उठा रहे हैं, वे आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने यह बात जोर देकर कही कि इजरायल को खुद की रक्षा करने का पूरा हक है, और हमास के खात्मे तक यह अभियान रुकेगा नहीं।
“फिलिस्तीनी राज्य की मांग, आतंक को इनाम”
इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लंदन, ओटावा (कनाडा) और पेरिस (फ्रांस) में बैठकर कुछ देश जिस तरह से एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की मांग कर रहे हैं और साथ ही इजरायल से युद्ध रोकने को कह रहे हैं, वह सीधे तौर पर 7 अक्टूबर के हमले के लिए एक इनाम जैसा है। उन्होंने कहा, “हमारी सीमा पर हमास जैसे आतंकवादी जब तक पूरी तरह नष्ट नहीं हो जाते, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।”
7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर एक बड़ा आतंकी हमला किया था, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी। उसके बाद से इजरायल ने हमास के खिलाफ गाजा में सशक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की है। लेकिन जैसे-जैसे इस अभियान में आम नागरिकों की मौतें बढ़ीं, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय आलोचना भी तेज होती गई है।

