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Akhilesh Yadav की फोटो WhatsApp पर लगाना पड़ा भारी… SSP ने 6 सिपाहियों के खिलाफ की बड़ी कार्रवाई

नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल गर्मा गया जब शिकोहाबाद कोतवाली में तैनात सिपाही प्रदीप ठाकुर द्वारा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के जन्मदिन पर व्हाट्सएप स्टेटस पर उनकी तस्वीर के साथ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी गई। यह स्टेटस जल्द ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद सपा कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की। वहीं इस पूरे मामले को देखते हुए एसएसपी सौरभ दीक्षित ने प्रदीप ठाकुर समेत 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

सपा नेताओं ने पुलिस अधीक्षक से की शिकायत

आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष शिवराज सिंह यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सौरभ दीक्षित से मुलाकात की और आरोपी सिपाही के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदीप ठाकुर ने अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया है, जिससे सपा समर्थकों की भावनाएं आहत हुई हैं।

शिकायत के बाद जांच के आदेश

वहीं शिकायत मिलने के बाद SSP सौरभ दीक्षित ने मामले की जांच के लिए CO सदर चंचल त्यागी को निर्देश दिए। हालांकि, मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से मीडिया को कोई आधिकारिक बयान या प्रेस नोट जारी नहीं किया गया। पूरा मामला चुपचाप आगे बढ़ाया गया, जिससे सार्वजनिक और मीडिया हलकों में संदेह और अटकलें बढ़ती रहीं।

जांच के बाद 6 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

शुक्रवार देर रात, सूत्रों के माध्यम से जानकारी सामने आई कि प्रदीप ठाकुर समेत 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई, लेकिन इसके बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि या प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई। यह मामला अब भी आधिकारिक बयान के अभाव में चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्रदीप ठाकुर की तैनाती अयोध्या में… 

जब इस मामले में फिरोजाबाद के अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) त्रिमोहन बेसिन से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि प्रदीप ठाकुर पहले तत्कालीन अपर एसपी ग्रामीण अखिलेश भदौरिया के हमराह के रूप में कार्यरत था, लेकिन वर्तमान में उसकी तैनाती शिकोहाबाद कोतवाली में है। फिलहाल उसकी ड्यूटी अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि में लगी हुई है। यानी घटना के समय वह स्थायी रूप से फिरोजाबाद में नहीं था, जो इस मामले में एक तकनीकी पेच भी खड़ा करता है।

आधिकारिक चुप्पी से बढ़ा असमंजस

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि फिरोजाबाद पुलिस प्रशासन ने न ही मीडिया सेल ग्रुप में कोई बयान जारी किया और न ही किसी प्रेस को औपचारिक जानकारी दी। हालांकि कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन अधिकारियों की चुप्पी ने मामले को और ज्यादा रहस्यमय और संवेदनशील बना दिया है।

सपा समर्थकों ने की कार्रवाई की मांग 

यह मामला अब सिर्फ एक व्हाट्सएप स्टेटस तक सीमित नहीं रहा। यह एक राजनीतिक और प्रशासनिक विषय बन गया है, जिसमें सपा समर्थक अपमानजनक भाषा पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस प्रशासन बिना शोर-शराबे के निष्कर्ष पर पहुंचना चाहता है। इस विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए किसी अधिकारी की अभिव्यक्ति की सीमाएं क्या होनी चाहिए, और सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाले संदेशों की जवाबदेही किसकी है।

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