Punjab Child Commission: नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर बढ़ते अश्लील और भ्रामक कंटेंट को लेकर पंजाब बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए साइबर सेल को नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि हंसी-मजाक के नाम पर परोसे जा रहे डबल मीनिंग वीडियो, ड्रग्स के महिमामंडन और गन कल्चर को बढ़ावा देने वाले कंटेंट बच्चों की मानसिकता पर गहरा और गलत प्रभाव डाल रहे हैं।
बाल आयोग ने साइबर सेल से ऐसे सभी वीडियो और पोस्ट की पहचान कर उन्हें तुरंत प्रतिबंधित करने की मांग की है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी निर्देशित किया गया है कि वे अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को सख्त बनाएं और बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करें।
-डिजिटल स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी
आयोग के अनुसार, इंटरनेट की आज़ादी का मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का कंटेंट बेहिचक अपलोड करे। जब यह सामग्री किशोरों और बच्चों तक पहुंचती है, तो वह उनके सोचने, समझने और व्यवहार करने के तरीके को प्रभावित करती है। डबल मीनिंग संवाद, हिंसात्मक हथियारों के प्रदर्शन और नशे के ग्लैमर को बढ़ावा देने वाले वीडियो बच्चों में गलत आदर्श स्थापित कर रहे हैं।
-सख्त कानूनों की आवश्यकता
इस मुद्दे को लेकर कई बाल मनोचिकित्सकों और शिक्षाविदों ने भी चिंता जताई है। उनका मानना है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के कंटेंट पर अंकुश लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और कड़े साइबर कानूनों की आवश्यकता है।
