नेशनल डेस्क: शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार की उस योजना पर सवाल उठाए हैं जिसमें सीमा पार आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को विदेश भेजा जा रहा है। राउत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष का समर्थन तो चाहती है, लेकिन उसे नजरअंदाज भी कर रही है।
संजय राउत ने क्या कहा?
राउत का कहना है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा, “सरकार विपक्ष का समर्थन मांग रही है, लेकिन विपक्षी नेताओं को प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं कर रही।” उन्होंने उदाहरण दिया कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 सांसद लोकसभा में हैं, लेकिन किसी को प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि टीएमसी, समाजवादी पार्टी (SP) और आरजेडी जैसे दलों को भी नजरअंदाज किया गया है।
विपक्ष की मांग क्या थी?
राउत ने बताया कि विपक्ष ने पहले ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे ठुकरा दिया। विपक्ष चाहता था कि पहले संसद में चर्चा हो, फिर अगर जरूरत हो तो प्रतिनिधिमंडल विदेश भेजा जाए। साथ ही, विपक्ष की यह भी मांग थी कि एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर भी भेजा जाए, लेकिन इस पर भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
सांसद विदेश जाकर क्या करेंगे?
राउत ने सवाल किया कि सांसद विदेश जाकर क्या करेंगे? क्या इससे भारत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहता है? उन्होंने कहा कि इजरायल-गाजा युद्ध के दौरान न तो प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने और न ही रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने विदेशों में प्रतिनिधिमंडल भेजे। उन्होंने इसे “राजनीतिक नाटक” बताया।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद शशि थरूर को सात में से एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, भले ही पार्टी की राय अलग हो। लेकिन कांग्रेस नेता जयराम रमेश और मनिकम टैगोर ने सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी पार्टियों से सुझाव नहीं लिए और विपक्ष को दरकिनार कर दिया। टैगोर ने कहा कि पहले प्रधानमंत्री ऐसे प्रतिनिधिमंडलों के लिए विपक्ष के नेताओं से सलाह लेते थे, जिससे संसदीय गरिमा बनी रहती थी। सरकार का कहना है कि इन सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों के जरिए भारत दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है और भारत की नीति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की है।