
नई दिल्ली: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और पूर्व दिल्ली मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने कहा कि चार साल की लंबी जांच में कोई भी आपराधिक साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि जैन ने भ्रष्टाचार किया हो। इसलिए कोर्ट ने इस मामले को बंद कर दिया।
इस मामले की शुरुआत 2019 में हुई थी, जब दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग ने शिकायत की थी कि सत्येंद्र जैन और कुछ लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए 17 लोगों की एक ‘क्रिएटिव टीम’ को नियमों के बिना नियुक्त किया था। साथ ही आरोप था कि इन लोगों को असंबंधित परियोजना के पैसे से वेतन दिया गया, जो गलत था।
करीब चार साल तक जांच करने के बाद, अप्रैल 2022 में सीबीआई ने कहा कि उन्हें जैन या अन्य आरोपियों के खिलाफ कोई भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी का सबूत नहीं मिला। जांच में यह भी पता चला कि न तो किसी को व्यक्तिगत फायदा हुआ और न ही सरकार को कोई नुकसान हुआ। पेशेवरों की नियुक्ति की जरूरत भी सही थी, इसमें कोई गड़बड़ी या अपराध नहीं पाया गया।
कोर्ट ने कहा कि जब जांच एजेंसी को इतने लंबे समय तक कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, तो आगे मामले को चलाना सही नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी बताया कि हर फैसला जो नियमों के बिलकुल सही पालन में न हो, वह भ्रष्टाचार नहीं कहलाता। भ्रष्टाचार साबित करने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं, जो इस मामले में नहीं मिले। इस फैसले से सत्येंद्र जैन को बड़ी राहत मिली है और उनके खिलाफ चल रहा यह मामला बंद हो गया है।
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