नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने बोधगया स्थित प्रसिद्ध महाबोधि महावीर मंदिर का पूरा नियंत्रण बौद्ध समुदाय को देने की मांग वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट में नहीं उठाया जा सकता और याचिकाकर्ता को पहले पटना हाईकोर्ट जाना चाहिए।
यह याचिका महाराष्ट्र की सामाजिक कार्यकर्ता सुलेखाताई नलिनिताई नारायणराव कुंभारे ने दायर की थी। उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि वह केंद्र सरकार और बिहार सरकार को यह आदेश दे कि वे बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 में बदलाव करें, ताकि मंदिर का पूरा प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंपा जा सके। फिलहाल यह मंदिर एक प्रबंधन समिति द्वारा चलाया जाता है, जिसमें हिंदू और बौद्ध दोनों समुदायों के लोग शामिल होते हैं। यह समिति बिहार सरकार की निगरानी में काम करती है।
सुप्रीम कोर्ट में सीधे सुनवाई योग्य नहीं है याचिका
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ, जिसमें जज एम.एम. सुंदरेश और के. विनोद चंद्रन शामिल थे, ने साफ कहा कि यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में सीधे सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने कहा, “हम इस पर कैसे सुनवाई करें? यह मामला हाईकोर्ट में उठाया जाना चाहिए। हम सीधा आदेश नहीं दे सकते।” इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट में जाने की अनुमति दे दी।
प्रबंधन पूरी तरह बौद्ध समुदाय के हाथ में होना चाहिए
याचिका में कहा गया था कि महाबोधि मंदिर, जो कि यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल भी है और बौद्ध धर्म का अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है, उसका प्रबंधन पूरी तरह बौद्ध समुदाय के हाथ में होना चाहिए, क्योंकि यह उनके धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों से जुड़ा है।
इसी मंदिर में भगवान बुद्ध को प्राप्त हुआ था ज्ञान
बताते चलें कि, महाबोधि मंदिर वही स्थान है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है। लेकिन 1949 के कानून के अनुसार, इसके प्रबंधन में हिंदुओं और बौद्धों दोनों का प्रतिनिधित्व होता है, जिस पर कई बौद्ध संगठन लंबे समय से आपत्ति जताते आ रहे हैं।

