नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर एक बार फिर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एससी (अनुसूचित जाति), एसटी (अनुसूचित जनजाति) और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के साथ उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि इन वर्गों के योग्य उम्मीदवारों को “उपयुक्त नहीं पाया गया” (Not Found Suitable – NFS) कहकर जानबूझकर नौकरी नहीं दी जा रही है, खासकर प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर जैसे पदों पर।
उन्होंने इस प्रक्रिया को “नया मनुवाद” करार दिया और कहा कि यह बी.आर. अंबेडकर द्वारा दी गई शिक्षा के महत्व की सोच पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा,’उपयुक्त नहीं पाया गया’ अब नया मनुवाद है। योग्य एससी/एसटी/ओबीसी उम्मीदवारों को जानबूझकर अयोग्य कहा जा रहा है ताकि उन्हें शिक्षा और नेतृत्व से दूर रखा जा सके।”
‘Not Found Suitable’ अब नया मनुवाद है।
SC/ST/OBC के योग्य उम्मीदवारों को जानबूझकर ‘अयोग्य’ ठहराया जा रहा है – ताकि वे शिक्षा और नेतृत्व से दूर रहें।
बाबासाहेब ने कहा था: शिक्षा बराबरी के लिए सबसे बड़ा हथियार है। लेकिन मोदी सरकार उस हथियार को कुंद करने में जुटी है।
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— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 27, 2025
60% प्रोफेसर और 30% एसोसिएट प्रोफेसर पद खाली
राहुल गांधी ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 60% प्रोफेसर पद और 30% एसोसिएट प्रोफेसर पद, जो आरक्षित थे, खाली पड़े हैं क्योंकि उम्मीदवारों को NFS घोषित कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि ये स्थिति सिर्फ DU में ही नहीं, बल्कि IITs और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भी देखी जा रही है।
संविधान और सामाजिक न्याय के साथ धोखा
राहुल गांधी का कहना है कियह सिर्फ नौकरी या शिक्षा की बात नहीं है, यह अधिकार, सम्मान और भागीदारी की लड़ाई है,और यह संविधान और सामाजिक न्याय के साथ धोखा है। उन्होंने यह भी कहा कि अब सभी मिलकर इस तरह की आरक्षण विरोधी नीतियों का संविधान के दम पर विरोध करेंगे।

