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SCO Summit 2025: डायरेक्ट फ्लाइट-ट्रेड समेत कई मुद्दों पर सहमति, जानें US से तनाव के बीच भारत-चीन की बैठक की 10 बड़ी बातें

SCO Summit 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जापान के दौरे के तुरंत बाद शनिवार को चीन के त्येनजिन शहर पहुंचे। वे 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। रविवार को पीएम मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बातचीत की। इस दौरान उन्होंने सीमा प्रबंधन और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों के फिर से शुरू होने पर समझौता किया। उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा के पुनः शुरू होने के लिए भी शी जिनपिंग का धन्यवाद किया। ऐसे में आइए जानते हैं कि भारत-चीन की बैठक की 10 बड़ी बातें क्या हैं।

 

 

एससीओ शिखर सम्मेलन का उद्घाटन
त्येनजिन में शिखर सम्मेलन का स्वागत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बड़े उत्साह से किया। सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अन्य विश्व नेताओं से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

 

 

 

संबंधों में सुधार और स्थिरता
मोदी और शी जिनपिंग ने कहा कि पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच संबंधों में स्थिर प्रगति हुई है। दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए और साझेदारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

 

भारत-चीन सीधी उड़ानें फिर शुरू
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू होंगी। कोविड-19 महामारी के कारण ये सेवाएं बंद हो गई थीं। पहले यात्रियों को हांगकांग या सिंगापुर के जरिए ही यात्रा करनी पड़ती थी।

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा और वीजा
मोदी ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा और पर्यटक वीजा को फिर से शुरू करना दोनों देशों के बीच विश्वास का प्रतीक है। चीन ने पहले ही यह यात्रा बहाल कर दी थी। भारत ने हाल ही में चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जारी करना शुरू किया है।

 

आतंकवाद और निष्पक्ष व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत-चीन रिश्तों को किसी तीसरे देश के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों देशों ने वैश्विक आतंकवाद और निष्पक्ष व्यापार जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की बात कही।

 

आपसी भरोसा बढ़ा
साल 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। लेकिन अब मोदी और शी जिनपिंग ने माना कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी है, जिससे आपसी भरोसा बढ़ा है।

 

नागरिकों की भलाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए
शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन अच्छे पड़ोसी और दोस्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को अपने नागरिकों की भलाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

 

सीमा विवाद को रिश्तों की परिभाषा नहीं बनाना चाहिए
शी जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि सीमा विवाद को रिश्तों की परिभाषा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से संबंधों को स्थिर और स्वस्थ बनाने की बात कही।

 

अर्थव्यवस्था और बाजार में सहयोग
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) सेक्टर चीनी कंपनियों से लाभान्वित होगा। वहीं चीन को भारतीय बाजारों तक पहुंच मिलने से बड़ा आर्थिक फायदा होगा। इस सहयोग से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

 

सीमा व्यापार फिर से शुरू
हाल ही में विदेश मंत्रियों की बातचीत के बाद दोनों देशों ने सीमा पार व्यापार दोबारा खोलने का फैसला किया है। इससे व्यापार में विविधता आएगी और भारत को दुर्लभ खनिज, उर्वरक, टनल बोरिंग मशीन जैसी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

 

अमेरिका के टैरिफ के बीच नया समीकरण
यह कूटनीतिक नजदीकी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने भारत पर भी भारी टैरिफ लगाए हैं। ऐसे में भारत-चीन की दोस्ती अमेरिका की विदेश नीति के लिए चुनौती बन सकती है और दशकों की रणनीति को बदल सकती है।

 

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