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धोखाधड़ी मामले में शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा की बढ़ी मुश्किलें, लुक आउट सर्कुलर जारी

नई दिल्ली। अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस दंपति के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिल्पा और राज अक्सर विदेश यात्रा करते रहते हैं, इसलिए उन पर नजर रखने और देश छोड़कर भागने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया।

 

क्या है मामला?
14 अगस्त को जुहू पुलिस स्टेशन में एक कारोबारी ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने कारोबारी से लोन और निवेश सौदे के नाम पर करीब 60 करोड़ रुपये लिए। शिकायतकर्ता कोठारी के अनुसार अप्रैल 2015 में उन्होंने 31.95 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। सितंबर 2015 में उन्होंने दूसरी किस्त के तौर पर 28.53 करोड़ रुपये दिए। यह पूरी रकम शिल्पा और राज की कंपनी बेस्ट डील टीवी के बैंक खाते में गई।

कंपनी छोड़ने के बाद खुला राज
साल 2016 में शिल्पा शेट्टी ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कोठारी को पता चला कि कंपनी पहले से ही एक अन्य निवेशक के साथ धोखाधड़ी के मामले में फंसी हुई थी और उस पर दिवालिया कार्यवाही (Insolvency Proceedings) चल रही थी। कोठारी का आरोप है कि कई बार पैसे वापस लेने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। उनका कहना है कि कंपनी में किया गया निवेश वास्तव में शिल्पा और राज के निजी उपयोग के लिए खर्च हुआ।

 

किन धाराओं में केस दर्ज हुआ?

मुंबई पुलिस ने शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:

-धारा 403 – बेईमानी से संपत्ति का गबन

-धारा 406 – आपराधिक विश्वासघात

-धारा 34 – साझा आपराधिक मंशा

 

लुकआउट सर्कुलर क्यों होता है जारी?
लुकआउट सर्कुलर (LOC) एक ऐसा नोटिस है जिसे पुलिस या एजेंसी किसी संदिग्ध या आरोपी पर जारी करती है। इसका मकसद होता है कि आरोपी विदेश न भाग सके उसकी गतिविधियों पर एयरपोर्ट और सीमा चौकियों पर नजर रखी जा सके।

 

शिल्पा और राज कुंद्रा ने कही ये बात
इन आरोपों पर शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा ने पूरी तरह से इनकार किया है। उनके वकील प्रशांत पाटिल ने बयान जारी कर कहा यह आरोप निराधार और दुर्भावनापूर्ण हैं। यह मामला पुराने वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है। कंपनी वित्तीय संकट में फंस गई थी और बाद में मामला एनसीएलटी (National Company Law Tribunal) तक पहुंचा। यह एक इक्विटी निवेश का सौदा था, न कि कोई धोखाधड़ी।

वकील ने यह भी बताया कि कंपनी को पहले ही परिसमापन आदेश (Liquidation Order) मिल चुका है और इस संबंध में सभी जरूरी दस्तावेज, ऑडिट रिपोर्ट और नकदी प्रवाह का ब्यौरा पहले ही आर्थिक अपराध शाखा को दिया जा चुका है।

 

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