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Axiom-4 Mission : यह खुशी के आंसू … बेटे के सफलतापूर्वक उड़ान भरने पर भावुक हुई Shubhanshu Shukla की मां

नेशनल डेस्क : 25 जून 2025 को भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ मिलकर Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर उड़ान भर ली है। यह मिशन भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजकर 1 मिनट पर फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ। इस ऐतिहासिक क्षण ने ना सिर्फ भारत के अंतरिक्ष मिशन को वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा किया, बल्कि करोड़ों भारतीयों के दिल में गर्व और उत्साह भर दिया। लॉन्च के समय उनकी मां प्रार्थना में हाथ जोड़े बैठी थीं और जैसे ही रॉकेट ने उड़ान भरी, उनकी आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

फाल्कन 9 रॉकेट बना उड़ान का सहारा

इस अंतरिक्ष यात्रा को स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट की मदद से अंजाम दिया गया। नासा ने पुष्टि की है कि रॉकेट का मुख्य इंजन सफलतापूर्वक काम कर चुका है और अब अंतरिक्ष यान पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) में प्रवेश कर चुका है। इसे अंतरिक्ष विज्ञान की भाषा में “MECO” यानी Main Engine Cut-Off कहा जाता है, जो यह दर्शाता है कि यान ने धरती की गुरुत्वाकर्षण सीमा को पार कर लिया है और अब वह अंतरिक्ष में स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ रहा है।

परिवार की आंखों में गर्व और आंसू

शुभांशु शुक्ला की उड़ान को लेकर उनके घर में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लॉन्च के समय उनकी मां प्रार्थना में हाथ जोड़े बैठी थीं और जैसे ही रॉकेट ने उड़ान भरी, उनकी आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। पिता शंभू दयाल शुक्ला ने मीडिया से कहा कि यह पल उनके लिए जीवन का सबसे गर्व का क्षण है। उन्होंने भगवान का धन्यवाद किया और शुभांशु के मिशन की सफलता की प्रार्थना की। यह दृश्य दिखाता है कि जब कोई बेटा देश के लिए कुछ बड़ा करता है, तो उसका परिवार किस गर्व से भर उठता है।

अंतरिक्ष से आया भारत को भावुक संदेश

अंतरिक्ष में पहुंचते ही शुभांशु शुक्ला ने देशवासियों के नाम एक खास संदेश भेजा, जो सुनने वालों के दिल को छू गया। उन्होंने कहा – “नमस्कार, मेरे प्यारे देशवासियों! क्या सफर है! हम 41 साल बाद फिर अंतरिक्ष में पहुंचे हैं। यह एक अद्भुत अनुभव है। हम इस समय 7.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं। मेरे कंधे पर लहराता तिरंगा मुझे याद दिलाता है कि मैं अकेला नहीं, आप सभी मेरे साथ हैं। यह केवल मेरी यात्रा नहीं है, यह भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक नई शुरुआत है। मैं चाहता हूं कि आप सब भी इसका हिस्सा बनें। आपका सीना गर्व से चौड़ा होना चाहिए। आइए, हम सब मिलकर इस मिशन को आगे बढ़ाएं। जय हिंद! जय भारत!”

अंतरिक्ष स्टेशन से डॉकिंग की तैयारी

अब जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी की कक्षा में पहुंच चुका है, अगला कदम है अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ना, जिसे डॉकिंग कहा जाता है। नासा ने जानकारी दी है कि यह डॉकिंग 26 जून की शाम 4:30 बजे की जाएगी। इसके बाद शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम ISS के अंदर प्रवेश करेंगे, जहां वे करीब दो हफ्ते रहकर वैज्ञानिक प्रयोग और अनुसंधान कार्यों में हिस्सा लेंगे।

भारत के लिए नया युग और नई शुरुआत

शुभांशु शुक्ला की यह अंतरिक्ष यात्रा केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत के लिए एक नई शुरुआत है। यह दर्शाता है कि भारत अब अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक में वैश्विक मंच पर आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ रहा है। यह मिशन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है कि अगर लगन और मेहनत हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। यह केवल एक लॉन्च नहीं था, बल्कि यह था भारत के भविष्य की नींव रखने वाला क्षण।

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