नेशनल डेस्क: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत पूरी दुनिया में नियमों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। वह संयुक्त राष्ट्र सैनिक योगदानकर्ता देशों (UNTCC) के प्रमुखों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, जिसकी मेजबानी भारत पहली बार कर रहा है। इस सम्मेलन में उन्होंने कहा कि कुछ देश आज भी अंतर्राष्ट्रीय नियमों को तोड़ रहे हैं, उन्हें कमजोर कर रहे हैं, या फिर अपने फायदे के लिए नए नियम बनाकर दुनिया पर दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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भारत का रुख
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत इन कोशिशों के खिलाफ है और चाहता है कि पुराने अंतर्राष्ट्रीय ढांचों में सुधार हो और नियमों का सभी देशों द्वारा समान रूप से पालन किया जाए। उन्होंने कहा, “कुछ देश अंतर्राष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं, जबकि भारत हमेशा से नियमों की रक्षा में खड़ा रहा है। हम पुरानी वैश्विक संरचनाओं में सुधार के पक्ष में हैं और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता है।”
#WATCH | Defence Minister Rajnath Singh speaks at United Nations Troop Contributing Countries’ (UNTCC) Chiefs Conclave in Delhi
He says, “Now a days, some nations are openly violating the international rules, some are trying to undermine it, while some want to create their own… pic.twitter.com/szJmIbc10R
— ANI (@ANI) October 14, 2025
संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका
रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भागीदारी केवल एक “विकल्प” नहीं, बल्कि “आस्था” का विषय है। उन्होंने कहा, “हज़ारों भारतीय सैनिक आज भी संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले शांति बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं। आज़ादी के बाद से ही भारत ने अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर करने वाले शुरुआती देशों में से एक है। यह भारत की उस सोच को दर्शाता है जिसे हम “वसुधैव कुटुंबकम” यानी “सारा संसार एक परिवार है” के रूप में जानते हैं।
सम्मेलन का महत्व
राजनाथ सिंह ने इस सम्मेलन को शांति, स्थिरता और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में जब संघर्ष और तनाव ढ़ रहे हैं, ऐसे में संयुक्त राष्ट्र चार्टर और उसमें दर्ज सिद्धांतों को और मज़बूती से लागू करने की ज़रूरत है।

