नेशनल डेस्क : भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने अपने स्पैडेक्स मिशन (SPADEX Mission) में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसरो ने रविवार रात (20 अप्रैल 2025) को दूसरी बार दो उपग्रहों को अंतरिक्ष में जोड़ने यानी डॉकिंग (Docking) की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। डॉकिंग का मतलब होता है—दो उपग्रहों को अंतरिक्ष में आपस में जोड़ना, और अनडॉकिंग का मतलब होता है उन्हें फिर से अलग करना। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
क्या कहा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने?
आपको बता दें कि भारत सरकार में अंतरिक्ष विभाग के मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी दी कि यह दूसरी डॉकिंग पूरी तरह सफल रही। उन्होंने बताया कि इस मिशन को 30 दिसंबर 2024 को पीएसएलवी-सी60 के जरिए लॉन्च किया गया था। पहली बार डॉकिंग 16 जनवरी 2025 को सुबह 6:20 बजे हुई थी और फिर इसे 13 मार्च 2025 को सफलतापूर्वक अनडॉक किया गया था।
दूसरी डॉकिंग: 20 अप्रैल को रात 8:20 बजे
इसरो ने जानकारी दी कि एसडीएक्स-01 (SDX-01) और एसडीएक्स-02 (SDX-02) नाम के दो उपग्रहों की दूसरी डॉकिंग 20 अप्रैल 2025 को रात 8:20 बजे की गई। डॉकिंग के बाद, इसरो ने इन दोनों सैटेलाइट्स के बीच पावर ट्रांसफर (Power Transfer) का भी सफल परीक्षण किया। 21 अप्रैल को यह अभ्यास पूरा हुआ, जिसमें एक उपग्रह के हीटर को दूसरे उपग्रह से मिली ऊर्जा से चलाया गया। यह ट्रांसफर लगभग चार मिनट तक चला और सबकुछ योजना के मुताबिक हुआ।
#WATCH | @isro achieves another milestone!
Successful second satellite docking under the Space Docking Experiment (SpaDeX) marks a giant leap for India’s space tech.
Union Minister @DrJitendraSingh congratulated ISRO for this stellar feat!#ISRO #SpaDeX #SpaceDocking… pic.twitter.com/XA7NvhdjN8
— PB-SHABD (@PBSHABD) April 21, 2025
एक ही प्रयास में मिली सफलता
दरअसल, यह डॉकिंग और अनडॉकिंग का पूरा काम 460 किलोमीटर ऊँचाई पर, 45 डिग्री झुकाव वाली गोलाकार कक्षा में किया गया। खास बात ये रही कि पूरी प्रक्रिया पहले ही प्रयास में सफल रही। इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि उनकी टीम ने इसे इतनी सहजता से किया जैसे कि ये कोई खेल हो। उन्होंने इसे भारतीय अंतरिक्ष तकनीक की एक बड़ी उपलब्धि बताया।
स्पैडेक्स मिशन का उद्देश्य
स्पैडेक्स मिशन का मकसद है। अंतरिक्ष में उपग्रहों को जोड़ने और अलग करने की तकनीक में महारत हासिल करना। इससे भविष्य में भारत के लिए कई बड़े रास्ते खुलेंगे, जैसे:
- खुद का भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाना,
- चंद्रमा पर मानव मिशन भेजना,
- चंद्रमा से नमूने लाकर धरती पर लाना,
- और अंतरिक्ष में लंबे समय तक टिके रहने वाले मिशन को अंजाम देना।
आगे की योजना क्या है?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगले दो हफ्तों में और भी कई प्रयोग किए जाएंगे ताकि इस तकनीक को और बेहतर बनाया जा सके। भारत का यह मिशन न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से, बल्कि भविष्य के स्पेस एक्सप्लोरेशन के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकता है।

