नेशनल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने मिलकर एक खास सैटेलाइट लॉन्च किया है जिसका नाम है निसार (NISAR)। यह एक ऐसा सैटेलाइट है जो धरती की हर हलचल पर नजर रखेगा। निसार सैटेलाइट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से छोड़ा गया। यह लॉन्चिंग GSLV-F16 रॉकेट से की गई।
किस कक्षा में जाएगा सैटेलाइट?
यह सैटेलाइट पृथ्वी की सूर्य-समकालिक ध्रुवीय कक्षा (Sun-synchronous Polar Orbit) में स्थापित किया जाएगा। यह कक्षा लगभग 740 किलोमीटर ऊपर है, जहां से यह धरती का चक्कर लगाएगा।
क्या है ‘निसा’ सैटेलाइट की खासियत?
-निसार दुनिया का पहला रडार सैटेलाइट है, जो धरती को अंतरिक्ष से लगातार स्कैन करेगा।
-इसमें दो खास तरह के रडार लगे हैं, बैंड रडार व S-बैंड रडार ये दोनों मिलकर धरती की सतह, बर्फीले इलाके, जंगलों, खेतों और शहरों की नियमित निगरानी करेंगे।
GSLV-F16/NISAR
✅ Launch
✅ Orbit
✅ SeparationWHAT next?
Next: Commissioning, calibration, then science.
Stay tuned!
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— ISRO (@isro) July 30, 2025
कितना महंगा है यह मिशन?
-यह सैटेलाइट मिशन करीब 1.5 बिलियन डॉलर (लगभग 12,000 करोड़ रुपये) का है।
-यह दुनिया का सबसे महंगा सिविलियन अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट मिशन है।
कितने साल काम करेगा निसार?
-निसार सैटेलाइट को करीब 3 साल तक काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
-यह हर 12 दिन में पूरी धरती को स्कैन करेगा, जिससे हर बदलाव की जानकारी मिलेगी।
दिन हो या रात, हर मौसम में करेगा काम
-निसार सैटेलाइट किसी भी मौसम और रोशनी की स्थिति में काम कर सकता है।
-यह 24 घंटे धरती की तस्वीरें भेज सकता है, चाहे बादल हों या अंधेरा।
किस काम आएगा निसार?
-भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का पता लगाने में मदद करेगा।
-पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की निगरानी करेगा।
-जंगलों की कटाई, ग्लेशियर का पिघलना, और खेती के क्षेत्र में बदलाव पर नजर रखेगा।
कौन-सी तकनीक का इस्तेमाल?
-निसार में एक खास तकनीक लगाई गई है जिसे SWOT SAR (SweepSAR) कहा जाता है। यह तकनीक बड़े क्षेत्र को तेज़ी से स्कैन करने में मदद करती है।
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