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‘गैर मुल्ला प्याज खाने में लगा है…’, सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की सरेंडर टिप्पणी की आलोचना की

Sudhanshu Trivedi attacks Congress over AI summit controversy

Sudhanshu Trivedi attacks Congress over AI summit controversy

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भा.जा.पा.) के सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की। राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर आरोप लगाया था कि भाजपा सरकार ने अमेरिका के दबाव में आत्मसमर्पण किया है। त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी का यह बयान बहुत ही घटिया और निंदनीय है, जो यह दिखाता है कि उनकी मानसिकता कितनी खराब और खतरनाक हो गई है।

सुधांशु त्रिवेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर यह दिखा रहे हैं कि वे विपक्ष के नेता होने के बावजूद परिपक्व और गंभीर नहीं हैं। त्रिवेदी ने कहा, “भारत ने कई देशों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे, जिसमें कांग्रेस के सांसद भी शामिल थे, और अब राहुल गांधी दुनिया को बता रहे हैं कि विपक्ष का नेता बनने के बाद भी उनमें गंभीरता और परिपक्वता की कमी है।”

देश की गरिमा को ठेस पहुंचाई
भाजापा प्रवक्ता ने राहुल गांधी के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय सेना की वीरता और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को आत्मसमर्पण से जोड़कर न केवल सेना का अपमान किया, बल्कि देश की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई। त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी ने जो बयान दिया, वह पाकिस्तानी सेना या आतंकवादी संगठनों से भी नहीं सुनने को मिलता।

राहुल गांधी ‘गैर मुल्ला’ की तरह प्याज खा रहे
त्रिवेदी ने आगे कहा, “हिंदी में एक कहावत है- ‘नया मुल्ला ज्यादा प्याज खाता है’, लेकिन राहुल गांधी तो ‘गैर मुल्ला’ की तरह प्याज खा रहे हैं, कि उन्हें यह भी नहीं समझ आ रहा है कि वे देश के स्वाभिमान और सेना के शौर्य का कितना अपमान कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी पूछा, “राहुल गांधी क्या पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों और सेना से एक कदम आगे बढ़ना चाहते हैं? अब तक वे पाकिस्तान के लोगों और सेना के पक्ष में बयान देते थे, क्या वे अब पाकिस्तान के नेताओं से भी आगे बढ़कर उनका नेतृत्व करना चाहते हैं?”

इससे पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर पर भाजपा सरकार पर आरोप लगाया था कि अमेरिका के दबाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप का अनुसरण किया और आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि 1971 के युद्ध में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अमेरिका के दबाव को नकारते हुए अपनी नीति पर कायम रहे, जबकि मोदी सरकार ने ट्रंप के दबाव में झुक कर अपनी नीति बदल दी।

राहुल गांधी का बयान 
राहुल गांधी ने भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “मैं अब समझ गया हूं कि आरएसएस और भाजपा पर थोड़ा सा दबाव डालते ही ये लोग डरकर भाग जाते हैं। जब ट्रंप ने मोदी जी को ‘नरेंद्र-सरेंडर’ कहकर पुकारा, तो मोदी जी ने ट्रंप का अनुसरण किया। लेकिन 1971 के युद्ध में इंदिरा गांधी ने अमेरिका के दबाव को नहीं माना और कहा, ‘मुझे जो करना है, मैं करूंगी।'” कांग्रेस और भाजपा के बीच इस बयान को लेकर तीखी बहस जारी है, जिसमें दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

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