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‘तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण UPA सरकार की कूटनीति का परिणाम’, चिदंबरम बोले- क्रेडिट न ले मोदी सरकार

नेशनल डेस्क: कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने 26/11 मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण का “श्रेय” लेने के लिए मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह प्रत्यर्पण “यूपीए-युग की जमीनी तैयारी” का परिणाम है, न कि मोदी सरकार की कोई नई उपलब्धि।

यूपीए सरकार की कड़ी मेहनत का नतीजा
चिदंबरम ने कहा, “फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़े होकर उस चीज़ का श्रेय लेने की कोशिश करेंगे, जो दरअसल यूपीए सरकार द्वारा की गई कड़ी मेहनत का नतीजा है। 17 फरवरी तक, भारतीय अधिकारियों ने 26/11 की साजिश में राणा की भूमिका की पुष्टि कर दी थी, जो 2005 से चल रही थी, जब उसने लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई के साथ मिलकर काम किया था।”

मोदी सरकार ने इस प्रक्रिया की शुरुआत नहीं की
उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया यूपीए सरकार के तहत शुरू हुई थी, जब वह 2008 से 2012 तक केंद्रीय गृह मंत्री थे। चिदंबरम ने कहा, “मोदी सरकार ने इस प्रक्रिया की शुरुआत नहीं की। यह केवल यूपीए की सुसंगत और रणनीतिक कूटनीति से लाभान्वित हुआ। जब कूटनीति, कानून प्रवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ईमानदारी से किया जाता है, तो भारतीय राज्य क्या हासिल कर सकता है, यह उसका उदाहरण है।”

राणा के प्रत्यर्पण को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री ने 11 फरवरी को आत्मसमर्पण वारंट पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, राणा के कानूनी वकील ने इस आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन 7 अप्रैल को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी।

पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में अहम कदम
राणा, जो एक पाकिस्तानी-कनाडाई नागरिक हैं, को अमेरिका में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सदस्य होने और मुंबई हमलों के लिए भौतिक सहायता प्रदान करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। 26 से 29 नवंबर, 2008 के बीच हुए इन आतंकवादी हमलों में 174 से अधिक लोग मारे गए थे। राणा का प्रत्यर्पण 2008 के मुंबई हमलों के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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