नेशनल डेस्क: शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने शनिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाना राज्य सरकार का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार का फैसला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति राज्य पर “थोपी” गई है।
प्रधानमंत्री और शाह ने नई शिक्षा नीति बनाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने कहा, “यह फैसला महाराष्ट्र सरकार का नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने नई शिक्षा नीति बनाई है, जिसे देश के सभी राज्यों ने नकारा है। यह पूरे देश पर थोपी गई नीति है।” विपक्षी दलों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने का फैसला लेकर राज्य की भाषाई पहचान को कमजोर किया है।
16 अप्रैल को महाराष्ट्र सरकार की तरफ से एक सरकारी आदेश जारी हुआ था, जिसमें मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने की बात कही गई थी। इस पर विरोध हुआ, तो सरकार ने आदेश में बदलाव किया। नए संशोधित आदेश में कहा गया कि हिंदी तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाएगी, लेकिन अगर कोई छात्र दूसरी भाषा (हिंदी के अलावा) पढ़ना चाहता है, तो कम से कम 20 छात्रों की मांग होनी चाहिए।
सरकार की सफाई और बैठकें
24 जून को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि तीन-भाषा नीति पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर साहित्यकारों, भाषा विशेषज्ञों और राजनीतिक नेताओं के साथ बातचीत की जाएगी। 22 जून को मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ में इस मुद्दे पर एक बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, शिक्षा मंत्री दादा भुसे, राज्य मंत्री डॉ पंकज भोयर और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल थे।
कानून और संस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा
संजय राउत ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “पिछले 10 सालों से कानून और संस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं भी शिवसेना (उद्धव गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ न्याय नहीं कर रही हैं। हमें निष्पक्ष जांच की जरूरत है ताकि सही फैसला हो सके।”

