नेशनल डेस्क: शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में “तीन-भाषा नीति” को वापस लेने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे “मराठी विरोधियों को दिया गया जवाब” बताया है। ठाकरे ने कहा कि यह राज्य की एकता की जीत है और सभी राजनीतिक दलों ने मिलकर इसे हासिल किया है, भले ही उनकी विचारधारा अलग रही हो। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने यह फैसला नहीं लिया होता तो 5 जुलाई को बड़ा विरोध प्रदर्शन होता। अब इस दिन एक विजय रैली निकाली जाएगी।
सरकार ने रद्द किए आदेश
राज्य सरकार ने फिलहाल 16 अप्रैल और 17 जून को जारी किए गए सरकारी आदेश (जीआर) रद्द कर दिए हैं। इन आदेशों के अनुसार, स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने की बात कही गई थी। इसका विरोध कई संगठनों और नेताओं ने किया था। अब सरकार ने डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक नई समिति बनाई है, जो इस पर रिपोर्ट देगी। साथ ही, शिक्षा से जुड़े फैसलों के लिए वित्तीय विशेषज्ञों को भी नियुक्त किया गया है।
झूठ बोलना भाजपा की आदत: संजय राउत
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा यह झूठ फैला रही है कि उद्धव ठाकरे ने पहले तीन-भाषा नीति को मंजूरी दी थी। संजय राउत ने कहा, “अगर ऐसा था तो वह रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? झूठ बोलना भाजपा की आदत बन गई है। उन्होंने जबरदस्ती कैबिनेट में हिंदी थोपने की कोशिश की, लेकिन अब जनता की आवाज ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।”
सरकार का फैसला क्या था?
16 अप्रैल 2025 को महाराष्ट्र सरकार ने फैसला लिया कि राज्य के मराठी और अंग्रेजी स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किया जाएगा। 17 जून 2025 को सरकार ने इसमें थोड़ा बदलाव करते हुए कहा कि अगर कोई दूसरी भाषा पढ़ना चाहता है, तो कम से कम 20 छात्रों की मांग होनी चाहिए। 30 जून 2025 को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इन दोनों फैसलों को फिलहाल रद्द किया गया है और एक नई समिति इसकी समीक्षा करेगी।
मेष: दिन शुभ रहेगा...