नेशनल डेस्क : 14 जून 2025 की रात ब्रिटेन का एक अत्याधुनिक F-35B लाइटनिंग II फाइटर जेट केरल के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आपातकालीन स्थिति में उतारा गया था। यह विमान यूके के एयरक्राफ्ट कैरियर HMS Prince of Wales से उड़ान भर रहा था और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियमित अभ्यास कर रहा था। लेकिन मौसम खराब होने और ईंधन कम होने के कारण विमान को एयरक्राफ्ट कैरियर पर लैंड कराना संभव नहीं हो सका। इसके बाद उसे तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग की अनुमति दी गई। लगभग तीन हफ्तों तक विमान एयरपोर्ट पर ही खड़ा रहा, जिसके बाद रविवार (6 जुलाई) को ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) के लगभग 25 तकनीकी विशेषज्ञों की टीम तिरुवनंतपुरम पहुंची। जिसके बाद इस विमान को उसकी ग्राउंडिंग पोजिशन से हेंगर तक शिफ्ट कर दिया गया है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
#WATCH | Thiruvananthapuram, Kerala: A team of technical experts on board the British Royal Air Force Airbus A400M Atlas, arrive at the Thiruvananthapuram International Airport to assess the F-35 fighter jet.
The F-35 jet had made an emergency landing at the Thiruvananthapuram… pic.twitter.com/KEbM1BSRdE
— ANI (@ANI) July 6, 2025
A400M Atlas एयरक्राफ्ट से भारत आई टीम
आपको बता दें कि ये सभी A400M Atlas मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से भारत आए। इस टीम का उद्देश्य विमान की तकनीकी जांच और मरम्मत करना है। ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि टीम को विमान की स्थिति का आकलन करने और यह तय करने के लिए भेजा गया है कि क्या विमान को स्थानीय तौर पर मरम्मत किया जा सकता है या उसे डिसमेंटल कर यूके वापस भेजना होगा।
#WATCH | Thiruvananthapuram, Kerala: Stranded F-35B British fighter jet being moved to the hangar from its grounded position.
A team of technical experts on board the British Royal Air Force Airbus A400M Atlas arrived at the Thiruvananthapuram International Airport to assess the… pic.twitter.com/bL9pGrJzIs
— ANI (@ANI) July 6, 2025
MRO सुविधा में शिफ्ट होगा विमान
वहीं अब F-35B को उसकी ग्राउंडिंग पोजिशन से हेंगर तक शिफ्ट कर दिया गया है। उच्चायोग के प्रवक्ता के अनुसार, यूके ने एयरपोर्ट की MRO (Maintenance, Repair and Overhaul) सुविधा का उपयोग करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है और अब संबंधित भारतीय अधिकारियों के साथ व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए चर्चा चल रही है। विमान की मरम्मत प्रक्रिया के लिए ब्रिटिश इंजीनियर विशेष उपकरण लेकर आए हैं।
सुरक्षा में कोई कमी नहीं
यह विमान पूरी तरह से भारतीय CISF (सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स) और ब्रिटिश रक्षा कर्मियों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। सुरक्षा कारणों से इसकी गतिविधियों की जानकारी बहुत सीमित रखी गई है। हालांकि स्थानीय जनता के बीच इस हाई-टेक विमान को लेकर काफी जिज्ञासा और चर्चा बनी हुई है, और यह एक मार्केटिंग ट्रेंड का रूप भी ले चुका है।
भारतीय वायुसेना और नौसेना की सक्रिय भूमिका
भारतीय वायुसेना (IAF) ने भी इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई है। वायुसेना ने बताया कि जैसे ही विमान ने आपातकालीन डायवर्जन घोषित किया, उसे IAF की IACCS (Integrated Air Command and Control System) द्वारा ट्रैक कर लिया गया और उसे लैंडिंग की मंजूरी दी गई। IAF अब विमान की मरम्मत और वापसी के लिए सभी आवश्यक तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है।
शुरुआती आकलन में दिखी मरम्मत की जरूरत
F-35B की शुरुआती जांच HMS Prince of Wales के इंजीनियरों ने की थी। उन्होंने माना कि विमान की मरम्मत और जांच के लिए अतिरिक्त विशेषज्ञता और उपकरणों की आवश्यकता है। इसके बाद ही ब्रिटेन से इंजीनियरिंग टीम को बुलाया गया, जो अब इस काम को अंजाम दे रही है।
110 मिलियन डॉलर से अधिक कीमत वाला यह F-35B स्टील्थ फाइटर जेट अब केवल एक तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि भारत-ब्रिटेन रक्षा सहयोग का प्रतीक बन गया है। इस पूरी घटना से यह साबित होता है कि दोनों देशों के बीच सैन्य, तकनीकी और रणनीतिक मोर्चों पर गहरा भरोसा और तालमेल मौजूद है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विमान को स्थानीय रूप से उड़ान के योग्य बनाया जाता है या उसे यूके भेजा जाता है।
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